अंबाला: अंबाला की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा करीब 125 साल पुराना वामन द्वादशी मेला अब शुरू हो चुका है. दरअसल, सोमवार को शाम होते-होते शहर की पुरानी अनाज मंडी में भगवान वामन के पांचों हिंडोलों को विधि-विधान के साथ भव्य पंडाल में स्थापित कर दिया गया है. अलग-अलग मंदिरों से शोभायात्रा के रूप में पहुंचे इन हिंडोलों के पंडाल में विराजमान होते ही मेले का माहौल भक्तिमय हो गया. अब 23 सितंबर तक यहां धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.
अंबाला और पटियाला में होती है ऐसी परंपरा
बता दें कि वामन द्वादशी मेले की सबसे खास बात यह है कि उत्तर भारत में इस परंपरा का आयोजन अंबाला और पटियाला में होने की जानकारी मिलती है. अंबाला में यह मेला वर्ष 1913-14 के आसपास से आयोजित होता आ रहा है. श्री सनातन धर्म सभा भी वर्ष 1913 से इसके आयोजन से जुड़ी रही है, जबकि सभा का पंजीकरण वर्ष 1963 में हुआ. यही वजह है कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की पुरानी परंपराओं और सामाजिक विरासत से भी जुड़ा हुआ माना जाता है.
पांच मंदिरों से शोभायात्रा के रूप में पहुंचे हिंडोले
इस बार मेले के लिए अलग-अलग मंदिरों से पांच हिंडोले निकाले गए. इनमें पहला हिंडोला बड़ा ठाकुरद्वारा मंदिर से शोभायात्रा के रूप में लाया गया, जबकि अन्य हिंडोले भी शहर के अलग-अलग मंदिरों से पहुंचे. बाजारों से होकर निकली शोभायात्रा के बाद सभी हिंडोलों को पुरानी अनाज मंडी में तैयार किए गए भव्य पंडाल में स्थापित किया गया. अब श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान वामन के दर्शन कर सकेंगे.
युवा पीढ़ी भी संभाल रही मेले की जिम्मेदारी
वहीं, लोकल 18 से बातचीत में पुजारी सुमन पांडेय ने बताया कि वामन द्वादशी की यह परंपरा अंबाला में लंबे समय से चली आ रही है. पांचों हिंडोलों को अलग-अलग मंदिरों से लाकर एक स्थान पर स्थापित करना इस मेले की प्रमुख परंपरा है. उनका कहना है कि मेले में दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं और युवा पीढ़ी को इस ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ने के लिए इस बार करीब 40 से 50 युवा व्यवस्थाओं में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
7 क्विंटल पंजीरी का तैयार किया गया प्रसाद
उन्होंने बताया कि मेले को लेकर सभा की ओर से भी विशेष तैयारियां की गई हैं. श्रद्धालुओं के लिए करीब 7 क्विंटल पंजीरी का प्रसाद तैयार किया गया है. इसमें अलग-अलग मंदिरों की ओर से भी करीब डेढ़ से दो क्विंटल तक प्रसाद तैयार किया गया है. वहीं, बारिश को देखते हुए पंडाल को वाटरप्रूफ टेंट से तैयार किया गया है. पंडाल की सजावट के लिए दिल्ली और कोलकाता से विशेष फूल मंगवाए गए हैं. इससे पूरे आयोजन स्थल को धार्मिक और आकर्षक स्वरूप दिया गया है.
ड्रोन से पुष्पवर्षा और भजन कार्यक्रम होंगे आकर्षण
मेले के दौरान भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी होंगे. आज यानी 21 सितंबर को रात होते-होते कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं पर ड्रोन से पुष्पवर्षा आकर्षण का केंद्र बन रही है. इसके अलावा भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी.
22 सितंबर को भजन और आतिशबाजी का आयोजन
22 सितंबर को भी दिनभर कार्यक्रम होंगे, जिसमें भजन गायन और रात के समय विशेष रोशनी व आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा. आयोजकों के अनुसार, सहारनपुर से विशेष आतिशबाजी मंगवाई गई है.
23 सितंबर को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
मेले का अंतिम दिन 23 सितंबर होगा, जब पुरानी अनाज मंडी से एक बार फिर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. इसमें बाहर से आने वाले बैंड और मेरठ से मंगवाई गई आकर्षक झांकियां भी शामिल होंगी. शोभायात्रा शहर के विभिन्न बाजारों से होती हुई ठाकुरद्वारा मंदिर पहुंचेगी.
नवरंग राय तालाब में पूरी होगी धार्मिक परंपरा
इसके बाद नवरंग राय तालाब में भगवान वामन के हिंडोलों को डुबकी लगाई जाएगी और धार्मिक परंपरा पूरी होने के बाद इन्हें वापस संबंधित मंदिरों में स्थापित किया जाएगा. इस तरह तीन दिन तक चलने वाला यह आयोजन अंबाला की धार्मिक आस्था के साथ उसकी करीब 125 साल पुरानी विरासत को भी एक बार फिर सामने लाएगा.









