हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। विधानसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश में इस समय कुल 15,451 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। यह आंकड़ा राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की ओर संकेत करता है, हालांकि सरकार का दावा है कि विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मानकों के अनुरूप है।
यह जानकारी कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार स्नातकोत्तर शिक्षकों (PGT) के 3,998 पद, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) और मौलिक स्कूल हेडमास्टर (ESHM) के 7,707 पद तथा प्राथमिक शिक्षक (PRT) और प्रधान शिक्षक के 3,746 पद खाली पड़े हैं। इतने बड़े स्तर पर रिक्तियां होने के बावजूद कुछ जिलों में प्राथमिक शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जिससे तैनाती और समायोजन को लेकर असंतुलन की स्थिति सामने आई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नूंह जिला शिक्षकों की कमी के मामले में सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 4,954 पद रिक्त हैं। इसके बाद यमुनानगर में 1,721, पलवल में 1,595, गुरुग्राम में 1,130 और फरीदाबाद में 934 पद खाली हैं। अंबाला में 925, सिरसा में 914, सोनीपत में 551 और रोहतक में 314 शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दक्षिणी और सीमावर्ती जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है।
दूसरी ओर भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जैसे नौ जिलों में प्राथमिक शिक्षक सरप्लस हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पोस्टिंग और ट्रांसफर नीति में सुधार की मांग करती है ताकि जहां जरूरत अधिक है वहां शिक्षकों की प्रभावी तैनाती की जा सके।
विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात को लेकर शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान है, जबकि हरियाणा में औसतन 27 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50 विद्यार्थियों के सेक्शन पर एक शिक्षक की जरूरत होती है, जबकि प्रदेश में 18 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक तैनात है। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर 22 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक पढ़ा रहा है। सरकार का तर्क है कि कुल अनुपात संतोषजनक है, लेकिन विषय-विशेष और क्षेत्रवार कमी के कारण व्यावहारिक समस्याएं बनी हुई हैं।
बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी विधानसभा में जानकारी दी गई। सरकार के अनुसार सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय और पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। 124 स्कूलों में अतिरिक्त शौचालय निर्माण के लिए करीब दो करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि प्रदेश के 135 सरकारी स्कूलों में अब भी चहारदीवारी नहीं है। इनमें झज्जर के 16, पलवल के 15, पंचकूला और रेवाड़ी के 12-12 तथा अंबाला और यमुनानगर के 10-10 स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समग्र अनुपात बेहतर होने से जमीनी स्तर की समस्याएं खत्म नहीं होतीं। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में विषय विशेषज्ञों की कमी, विज्ञान और गणित के शिक्षकों की अनुपलब्धता तथा प्रशासनिक दायित्वों के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। ऐसे में रिक्त पदों को शीघ्र भरना और सरप्लस शिक्षकों का तार्किक पुनर्वितरण आवश्यक है।
हरियाणा में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की योजनाओं के बीच शिक्षकों की उपलब्धता सबसे अहम कारक है। विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या मौजूदा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन पर्याप्त है या बड़े पैमाने पर भर्ती की आवश्यकता है। आने वाले बजट और भर्ती नीतियों में इस मुद्दे पर सरकार के कदमों पर सभी की नजर रहेगी।











