Haryana News: हरियाणा में तहसीलदारों की विभागीय परीक्षा के हालिया परिणामों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में बड़ी संख्या में तहसीलदार राजस्व, दीवानी और आपराधिक कानून जैसे अहम विषयों में असफल रहे, जबकि उर्दू विषय में उनका प्रदर्शन बेहतर देखने को मिला।
राजस्व और दीवानी कानून में खराब प्रदर्शन
पिछले साल 15 से 19 दिसंबर के बीच आयोजित इस परीक्षा में राजस्व कानून, जो तहसीलदारों के रोजमर्रा के कार्य का आधार माना जाता है, उसमें 21 में से 14 उम्मीदवार (करीब 67%) फेल हो गए। इस पेपर में पास होने के लिए 240 में से 120 अंक जरूरी थे, लेकिन केवल एक उम्मीदवार ही उच्च स्तर के साथ पास हो सका।
दीवानी कानून की स्थिति भी कुछ अलग नहीं रही। इस विषय में 35 में से 25 उम्मीदवार (करीब 71%) असफल रहे। यहां पास होने के लिए 120 में से 60 अंक निर्धारित थे, फिर भी केवल एक तहसीलदार ही परीक्षा पास कर पाया।
क्रिमिनल लॉ में भी कमजोर प्रदर्शन
आपराधिक कानून (क्रिमिनल लॉ) में भी परिणाम निराशाजनक रहे। इस विषय में 25 में से 15 उम्मीदवार (60%) फेल हो गए। इससे स्पष्ट है कि कानून से जुड़े प्रमुख विषयों में तहसीलदारों की पकड़ अपेक्षाकृत कमजोर है।
सिविल सेवा और वित्तीय नियमों में स्थिति बेहतर
हालांकि सिविल सेवा और वित्तीय नियमों के पेपर में स्थिति कुछ बेहतर देखने को मिली। इसमें 26 में से 11 उम्मीदवार फेल हुए, जबकि 10 उम्मीदवारों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर ‘क्रेडिट’ के साथ परीक्षा पास की।
उर्दू और पटवार से जुड़े विषयों में बेहतर रिजल्ट
उर्दू विषय में तहसीलदारों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। 75 अंकों की इस परीक्षा में पास होने के लिए 25 अंक आवश्यक थे, जिसमें 22 में से 19 उम्मीदवार सफल रहे। इसी तरह पटवार और स्थानीय निधि से जुड़े विषयों में भी परिणाम संतोषजनक रहे।
विभागीय तर्क: अनुभव की कमी बना कारण
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई तहसीलदार प्रमोशन के जरिए इस पद पर पहुंचे हैं और उनका बैकग्राउंड पटवारी या कानूनगो का रहा है। ऐसे में उन्हें कानून के जटिल विषयों की उतनी गहरी समझ नहीं होती, जिसके कारण उनके फेल होने की संभावना बढ़ जाती है।
दो साल में परीक्षा पास करना अनिवार्य
नियमों के अनुसार, तहसीलदारों को नियुक्ति के दो वर्ष के भीतर विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर उन्हें विशेष अनुमति लेकर ही दोबारा परीक्षा में बैठना पड़ता है।
पहले के परिणाम भी रहे कमजोर
मार्च 2025 में हुई परीक्षा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही थी। उस समय रेवेन्यू लॉ में 12 में से 8, सिविल लॉ में 15 में से 8 और क्रिमिनल लॉ में 10 में से 5 उम्मीदवार असफल रहे थे।
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