Youth from Asandh Dies in the US(मेरा हरियाणा नेटवर्क) करनाल। असंध क्षेत्र के गांव गंगाटेहड़ी निवासी 24 वर्षीय सुखविंद्र सिंह की अमेरिका में दर्दनाक मौत के बाद अब उसका पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की मदद के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है, ताकि परिजन अपने बेटे के अंतिम दर्शन कर सकें।
बताया गया कि 26 अप्रैल की रात में एक स्टोर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी। उस समय सुखविंद्र सिंह स्टोर पर काम खत्म करने के बाद अपने मालिक विक्रांत के साथ वहीं मौजूद था। आग तेजी से फैलने के कारण दोनों को संभलने का मौका नहीं मिला और धुएं व लपटों के बीच फंसकर उनकी मौत हो गई।
बचने की कोशिश रही नाकाम
जान बचाने के लिए दोनों ने बाथरूम की खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही ऑक्सीजन मिली, आग और भड़क गई। हालात इतने भयावह हो गए कि वे बाहर नहीं निकल सके और मौके पर ही दम तोड़ दिया।
परिवार का इकलौता सहारा था सुखविंद्र
सुखविंद्र सिंह करीब ढाई साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गया था। वह अपने पिता शीशपाल सिंह का इकलौता बेटा था और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी। उसे विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का कर्ज लिया था, जो अभी तक पूरी तरह चुकाया नहीं जा सका था। बेटे की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
शव भारत लाने की प्रक्रिया जारी
फिलहाल सुखविंद्र का पार्थिव शरीर टेक्सास में रखा गया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे ले जाया जाएगा, जहां से भारत भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
ऑनलाइन फंड से जुट रही मदद
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शव को भारत लाने, कागजी कार्रवाई और अंतिम संस्कार के लिए ऑनलाइन फंड इकट्ठा किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुड़कर आर्थिक सहयोग और अपील को साझा कर रहे हैं।
समाजसेवी रणबीर लोहान की अपील
समाजसेवी ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि इस कठिन समय में परिवार का सहारा बनें। उन्होंने बताया कि विदेश से शव लाने में काफी खर्च आता है, जिसे उठाना परिवार के लिए संभव नहीं है।
परिवार ने मांगा समाज का साथ
परिजनों ने भावुक शब्दों में कहा कि उनका इकलौता बेटा सपनों को पूरा करने विदेश गया था, लेकिन अब उसकी अंतिम विदाई के लिए भी मदद मांगनी पड़ रही है। उन्होंने समाज से सहयोग की अपील की है, ताकि सुखविंद्र सिंह को उसकी मिट्टी नसीब हो सके।
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