हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों को झटका: 58 साल से आगे नौकरी का दावा खारिज, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

On: May 6, 2026 3:09 PM
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हरियाणा से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आई है, जहां Punjab and Haryana High Court ने दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि 3 फरवरी 2026 के बाद संशोधित नियम लागू होने के चलते अब कोई भी कर्मचारी 58 वर्ष से अधिक सेवा जारी रखने का दावा नहीं कर सकता।

यह फैसला जस्टिस Harpreet Singh Brar की अदालत ने सुनाया, जिसमें इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। अदालत के इस निर्णय के बाद राज्य के हजारों कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है, खासकर उन कर्मचारियों पर जो 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं।

दरअसल, मामले में Shyam Lal Sharma व अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि वे गंभीर दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं और हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016 के तहत उन्हें पहले ही 60 वर्ष तक सेवा विस्तार दिया जा चुका था। ऐसे में सरकार द्वारा 3 फरवरी 2026 को किए गए संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील में कहा कि एक बार जब सेवा विस्तार का आदेश जारी हो चुका है, तो उनका अधिकार “क्रिस्टलाइज” हो चुका है और इसे बाद में छीना नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संशोधित अधिसूचना में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अर्जित अधिकारों को नियम बदलकर समाप्त नहीं किया जा सकता।

साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने समानता के अधिकार का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि सरकार ने केवल दिव्यांग कर्मचारियों को ही इस लाभ से बाहर किया है, जबकि ग्रुप-डी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों को अब भी 60 वर्ष तक सेवा में बने रहने की छूट दी जा रही है, जो कि भेदभावपूर्ण है।

वहीं, हरियाणा सरकार और बिजली निगमों की ओर से अदालत में कहा गया कि इसी मुद्दे पर पहले ही “रजनीश कुमार बनाम हरियाणा सरकार” मामले में डिवीजन बेंच फैसला दे चुकी है। सरकार ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति आयु सेवा शर्तों का हिस्सा होती है और राज्य को इसमें बदलाव करने का पूरा अधिकार है।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि डिवीजन बेंच पहले ही यह तय कर चुकी है कि 3 फरवरी 2026 के बाद संशोधित नियम मौजूदा कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अनुशासन के तहत पहले दिए गए फैसले का पालन करना आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और साफ कर दिया कि अब 58 वर्ष के बाद सेवा जारी रखने का दावा मान्य नहीं होगा।

इस फैसले को हरियाणा में सेवा नियमों को लेकर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में व्यापक स्तर पर देखने को मिलेगा।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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