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Sonipat Cow Nadini Death: हरियाण के सोनीपत में परिवार ने 18 साल पाली गाय नंदिनी की मौत पर इंसानों की तरह तेरहवीं और भोज का आयोजन किया. 11 गांवों के लोगों को भोज में बुलाया गया था. इस दौरान साधू संत भी मौके पर पहुंचे और हवन यज्ञ करवाया गया. नंदिनी दो महीने से बीमार चल रही थी और फिर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
सोनीपत के गांव तिहाड़ खुर्द में माविर ने अपनी गाय नंदिनी की तेरहवीं करवाई.
सोनीपत. 18 साल तक गाय नंदिनी को पाला. परिवार के सदस्य की तरह नंदिनी की देखभाल की. फिर जब उसकी मौत हुई तो इंसानों की तरह उसे विदाई दी और भोज का आयोजन भी किया. मामला हरियाणा के सोनीपत का है, जहां पर एक शख्स ने अपनी गाय के निधन के बाद उसकी तेहरवीं पर भोज और रस्में करवाईं.
दरअसल, सोनीपत के गांव तिहाड़ खुर्द में माविर ने अपनी गाय नंदिनी की तेरहवीं करवाई. 7 जुलाई को नंदिनी का निधन हो गया था. परिवार ने नंदिनी को केवल एक गाय नहीं बल्कि परिवार के सदस्य और मां का दर्जा दिया. यही वजह रही कि अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की सभी रस्में इंसानों की तरह विधि-विधान से संपन्न कराई गईं. तेरहवीं में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया और आसपास के 11 गांवों के लोगों के लिए भोज का भी प्रबंध किया गया.
गांव तिहाड़ खुर्द निवासी मंजीत ने बताया कि गौ माता नंदिनी करीब 18 वर्षों तक उनके परिवार का हिस्सा रही.परिवार के सदस्यों ने उसकी सेवा मां की तरह की और उसके निधन के बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. तेरहवीं के अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, गौभक्त और साधु-संत पहुंचे तथा गौ माता को श्रद्धांजलि अर्पित की. मंजीत ने कहा कि 2008 में यह गाय हमें मिली थी और उस दौरान महज तीन महीने की थी.
मंजीत ने बताया कि नंदिनी को रसगुल्ला बेहद पसंद था. इसी कारण तेरहवीं के भोज में विशेष रूप से रसगुल्ला भी बनाया गया. परिवार के अनुसार नंदिनी की छह पीढ़ियां आज भी उनके पास मौजूद हैं. गौर रहे कि नंदिनी को रस्सगुल्ले काफी पंसद थे, इसलिए मंजित ने करीब छह क्विंटल रसगुल्ले भी 11 गांवों के लोगों को भोज में खिलाए. मंजीत के भाई मेहरबान ने बताया कि जब नंदिनी की मां दो साल की थी, तो उसकी भी मौत हो गई थी. हमने नंदिनी को अपनी बेटी की तरह इसे पाला. अब काफी दुख हो रहा है और हमारे जीवन का बड़ा हिस्सा चला गया है. नंदिनी की मां को वह अपने रिश्तेदारों से लेकर आए थे और उस दौरान वह महज 20 साल के थे.
आसपास के 11 गांवों के लोगों के लिए भोज का भी प्रबंध किया गया.
तेरहवीं समारोह के दौरान हवन यज्ञ,गौ आरती और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इसके बाद 11 गांवों से पहुंचे लोगों के लिए विशाल भोज का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने गौ माता नंदिनी को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए परिवार की गौसेवा भावना की सराहना की.
सोनीपत में गाय नंदिनी को परिवार 18 साल से पाल रहा था.
मंजीत की पत्नी ने बताया कि दो महीने से नंदिनी बीमार थी और इलाज करवा रहे थे और बीमारी की वजह से ही उसकी मौत हो गई. मंजीत की पत्नी कहती हैं कि उनकी 14 साल पहले उनकी शादी हुई थी तो नंदिनी परिवार के पास पहले से ही थी. 1500 से 2000 लोगों को भोज दिया गया.
शख्स ने अपनी गाय के निधन के बाद उसकी तेहरवीं पर भोज और रस्में करवाईं.
परिवार ने बेसहारा गौवंश की समस्या को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने मांग की कि दूध देना बंद होने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए और ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. उनका कहना था कि गौ सेवा केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें













