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Chandan lagane ke fayde : हिंदू धर्म में चंदन को पवित्र और शुभ माना जाता है. अक्सर लोग इसे अपने माथे और शरीर पर भी लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विवाहित महिलाओं को सिर पर चंदन नहीं लगाना चाहिए. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य राजकुमार बताते हैं कि अगर सुहागिन महिलाएं चंदन लगाना चाहती हैं तो वे इसे अपने गले के कंठ पर लगा सकती हैं. सिर पर चंदन लगाने को पति की आयु से जोड़कर देखा जाता है. इन मान्यताओं को सभी महिलाओं के लिए एक समान और अनिवार्य नियम मानना उचित नहीं. चंदन भगवान शिव को भी अर्पित किया जाता है.
अंबाला. सनातन संस्कृति में चंदन को पवित्र और शुभ माना जाता है. पूजा-पाठ से लेकर भगवान के श्रृंगार तक चंदन का विशेष महत्व है. मंदिरों में भक्तों को चंदन का तिलक लगाया जाता है. कई लोग इसे अपने माथे और शरीर पर भी धारण करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि विवाहित महिलाओं को सिर पर चंदन नहीं लगाना चाहिए. लोकल 18 से अंबाला के ज्योतिषाचार्य राजकुमार बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गृहस्थ जीवन में रहने वाली विवाहित महिलाओं को अपने माथे या सिर पर चंदन लगाने से बचना चाहिए. अगर सुहागिन महिलाएं चंदन लगाना चाहती हैं तो वे इसे अपने गले के कंठ पर लगा सकती हैं. विवाहित महिलाओं के सिर पर चंदन लगाने को पति की आयु से जोड़कर देखा जाता है.
क्या विधवाएं लगा सकती हैं
ज्योतिषाचार्य राजकुमार कहते हैं कि विधवा महिलाएं अपने माथे पर चंदन लगा सकती हैं और इसे शुभ माना जाता है. चंदन भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाला पवित्र पदार्थ माना जाता है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और धार्मिक परंपराओं में तिलक लगाने के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए इन मान्यताओं को सभी महिलाओं के लिए एक समान और अनिवार्य नियम मानना उचित नहीं.
बजरंगबजी क्यों लगाने लगे सिंदूर
ज्योतिषाचार्य राजकुमार कहते हैं कि कुमकुम को सुहाग, सौभाग्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से कई विवाहित महिलाएं अपने माथे पर कुमकुम या सिंदूर का तिलक लगाती हैं. कुमकुम को हल्दी से भी तैयार किया जाता है. कुमकुम लगाने से पति की आयु बढ़ने का दावा भी किया जाता है. कुमकुम के महत्व को समझाते हुए ज्योतिषाचार्य ने भगवान राम और उनके परम भक्त हनुमान जी से जुड़ी कथा बताई. इस कथा के अनुसार, माता सीता को सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने इसका कारण पूछा. माता सीता ने भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम और उनके कल्याण की भावना से सिंदूर लगाने की बात कही. इसके बाद हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने के लिए अपने पूरे शरीर पर सिंदूर धारण कर लिया. यह कथा हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा से भी जुड़ी हुई है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…




