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Durga Puja 2026 : विजयादशमी पर मां दुर्गा की विदाई के समय बंगाल की सुहागन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. फरीदाबाद के सेक्टर-3 में भी यह परंपरा पूरे उत्साह से निभाई जाती है. आखिर सिंदूर खेला की शुरुआत क्यों हुई और मां की विदाई के समय ही यह रस्म क्यों निभाई जाती है. फरीदाबाद के सेक्टर-3 में होने वाली दुर्गा पूजा के आयोजनकर्ता शायोन सरकार लोकल 18 से बताते हैं कि इसे होली में रंग लगाने की तरह भी समझ सकते हैं. महिलाएं एक-दूसरे के चेहरे पर सिंदूर लगाकर मां दुर्गा को विदाई देती हैं. सिंदूर खेला की रस्म दुर्गा पूजा के विसर्जन वाले दिन निभाई जाती है.
फरीदाबाद. दुर्गा पूजा का नाम सुनते ही भव्य पंडाल, मां दुर्गा की सुंदर प्रतिमा और ढाक की गूंज याद आने लगती है. बंगाल में दुर्गा पूजा का खास महत्व है और यहां रहने वाले लोग दूसरे शहरों में भी इस त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं. नवरात्रि के आखिरी दिन यानी विजयादशमी पर एक ऐसा पल आता है, जब मां दुर्गा को विदाई दी जाती है. इस दौरान बंगाल की सुहागन महिलाएं सिंदूर खेला की रस्म निभाती हैं. महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा से अपने परिवार की खुशहाली और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. लेकिन आखिर सिंदूर खेला की शुरुआत क्यों हुई और मां की विदाई के समय ही यह रस्म क्यों निभाई जाती है. लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद के सेक्टर-3 में होने वाली दुर्गा पूजा के आयोजनकर्ता शायोन सरकार से बात की.
आपसी मेलजोल
शायोन बताते हैं कि सिंदूर सुहागन महिलाओं के सुहाग का प्रतीक माना जाता है. शादी के समय दूल्हा अपनी दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है. इसी परंपरा से सिंदूर का विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व जुड़ा हुआ है. विजयादशमी के दिन जब मां दुर्गा को विदाई दी जाती है, तब सुहागन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर इस रस्म को निभाती हैं. यह महिलाओं के आपसी मेलजोल और एक-दूसरे के प्रति प्रेम जताने का भी तरीका है.
शायोन सरकार बताते हैं कि सिंदूर खेला में मुख्य रूप से सुहागन महिलाएं ही हिस्सा लेती हैं. वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और त्योहार की खुशियां साझा करती हैं. इसे होली में रंग लगाने की तरह भी समझ सकते हैं, जिसमें महिलाएं एक-दूसरे के चेहरे पर सिंदूर लगाकर मां दुर्गा को विदाई देती हैं. पुरुष भी इस दौरान मौजूद रहते हैं, लेकिन इस रस्म में उनकी मुख्य भूमिका नहीं होती है. सिंदूर खेला की रस्म खासतौर पर दुर्गा पूजा के विसर्जन वाले दिन निभाई जाती है. इस दौरान महिलाएं मां दुर्गा से प्रार्थना करती हैं कि उनका पूरा साल सुख-शांति से बीते और परिवार में सब कुछ अच्छा रहे. मां दुर्गा अगले साल फिर आएं, ताकि भक्तों को दोबारा उनके दर्शन करने और पूजा करने का मौका मिले.
फिर लौटने की कामना
शायोन सरकार बताते हैं कि हमारे यहां फरीदाबाद के सेक्टर-3 में भी दुर्गा पूजा के दौरान यह परंपरा देखने को मिलती है. यहां बंगाली समुदाय के लोग मिलकर भव्य आयोजन करते हैं और पूरे श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की पूजा करते हैं. सिंदूर खेला के जरिए महिलाएं मां को विदाई देने के साथ अगले साल उनके लौटने की कामना भी करती हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…








