अंबाला: घर का मुख्य दरवाजा केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे घर की ऊर्जा और समृद्धि का प्रवेश द्वार माना गया है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, शाम का समय विशेष महत्व रखता है. इस दौरान मुख्य द्वार को लेकर की गई छोटी-सी लापरवाही भी घर के वातावरण पर असर डाल सकती है. दरअसल, मान्यता है कि यदि शाम के समय मुख्य दरवाजा लंबे समय तक बंद रखा जाए तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बाधित होता है, जबकि साफ-सुथरा और व्यवस्थित मुख्य द्वार सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
शाम के समय मुख्य दरवाजे को लेकर क्या है मान्यता?
वहीं, इस बारे में लोकल18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संध्या काल देवी लक्ष्मी के आगमन का समय माना गया है. ऐसे में घर का मुख्य द्वार स्वच्छ, प्रकाशयुक्त और स्वागत योग्य होना चाहिए. उनका कहना है कि मुख्य द्वार पर गंदगी, अंधेरा या लंबे समय तक ताला लगे रहने जैसी स्थिति शुभ नहीं मानी जाती है.
संध्या के समय दीपक जलाना माना जाता है शुभ
हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात में दरवाजा बंद करना आवश्यक है, लेकिन संध्या के समय कुछ देर के लिए मुख्य द्वार खुला रखना और वहां दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है. उन्होंने कहा कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, संध्या के समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है. यदि मुख्य द्वार खुला और साफ रहता है तो यह ऊर्जा घर में प्रवेश करती है, जिससे परिवार के सदस्यों के मन में शांति, उत्साह और सकारात्मक सोच बनी रहती है.
उन्होंने बताया कि इस समय मुख्य द्वार पूरी तरह बंद रखने से मां लक्ष्मी का स्वागत नहीं हो पाता, जिसके कारण आर्थिक परेशानियां और नकारात्मकता बढ़ने की आशंका मानी जाती है. हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं.
मुख्य द्वार की साफ-सफाई भी है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मुख्य द्वार खुला रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी साफ-सफाई पर भी नियमित ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्य द्वार के आसपास कूड़ा-कचरा, टूटी-फूटी वस्तुएं या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए. स्वच्छ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर के सौंदर्य के साथ-साथ सकारात्मक माहौल को भी मजबूत करता है.
मुख्य द्वार पर दीपक और गंगाजल का करें छिड़काव
उन्होंने बताया कि संध्या के समय मुख्य द्वार पर कुछ सरल उपाय भी शुभ माने गए हैं. सबसे पहले मुख्य द्वार पर घी या तेल का दीपक जलाना चाहिए. मान्यता है कि दीपक का प्रकाश नकारात्मकता को दूर कर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनाता है. इसके अलावा, मुख्य द्वार पर गंगाजल या शुद्ध जल का छिड़काव करना भी शुभ माना गया है.
कहा जाता है कि इससे घर का वातावरण पवित्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है. वहीं, पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि वास्तु के ये उपाय किसी अंधविश्वास के बजाय भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े हैं. यदि इन्हें श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक सोच के साथ अपनाया जाए तो घर का वातावरण अधिक शांत, सुखद और ऊर्जा से भरपूर महसूस हो सकता है.
इसलिए संध्या के समय मुख्य द्वार की साफ-सफाई, दीपक और सकारात्मक माहौल बनाए रखना आज भी कई परिवार अपनी दैनिक दिनचर्या का अहम हिस्सा मानते हैं.












