हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट सत्र के चोथे दिन छछरौली गांव की जमीन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1887 से अब तक संबंधित भूमि का मालिकाना हक सरकार के पास रहा है और पूरा शहर सरकारी भूमि पर बसा हुआ है। यह क्षेत्र गैर-मुमकिन आबादी के रूप में विकसित हुआ, जहां सैकड़ों परिवार कई पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2020 तक इन संपत्तियों की रजिस्ट्री भी होती रही, जिससे लोगों का विश्वास और अधिकार इस जमीन से जुड़ गए। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी आधार पर वर्षों से बसे परिवारों को असुरक्षित स्थिति में नहीं रखा जा सकता।
सीएम ने घोषणा की कि छछरौली गांव की जमीन का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पात्र निवासियों को मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करेगी, ताकि लंबे समय से रह रहे परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य लोगों को बेदखल करना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी अधिकार देना है। इस फैसले को क्षेत्र के निवासियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से जमीन की कानूनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।












