हरियाणा के जींद जिले के सफीदों क्षेत्र के गांव खरकगागर के एक परिवार पर ढाई महीने के लंबे इंतजार और दुख के बाद अब दुख की घड़ी टूटी है। गांव का 25 वर्षीय युवक कमल, जो करीब ढाई साल पहले डंकी (अवैध) रास्ते से पैसे कमाने इंग्लैंड गया था, का शव उसकी मौत के ढाई महीने बाद सोमवार को गांव पहुंचा। युवक की 16 सितंबर को इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
क्या है पूरा मामला?
मामला गांव खरकगागर का है। मृतक कमल अपने परिवार का इकलौता बेटा था। जानकारी के मुताबिक, उसने करीब ढाई साल पहले विदेश जाने का सपना देखा और इसके लिए उसने रिश्तेदारों और दोस्तों से काफी रकम उधार ली। डंकी रूट से इंग्लैंड जाने में उसके करीब 30 लाख रुपये खर्च आए। वह इंग्लैंड में अवैध रूप से रह रहा था और वहां काम कर रहा था।
मौत के बाद शव लाने में आई दिक्कत
16 सितंबर को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। मौत के बाद उसके शव को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो काफी लंबी और खर्चीली साबित हुई। इस काम में इंग्लैंड के बर्मिंघम में रह रहे नगर परिषद की पूर्व चेयरपर्सन वीना देशवाल और सज्जन देशवाल ने परिवार की मदद की। शव को भारत लाने में करीब तीन लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आया।
गांव पहुंचा शव, किया अंतिम संस्कार
लंबे इंतजार और कागजी दस्तावेजों के चक्कर के बाद आखिरकार सोमवार को कमल का शव उसके गांव खरकगागर पहुंच गया। परिवार और गांव वालों ने उसे अंतिम विदाई दी और गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह घटना एक बार फिर उन जोखिमों की ओर इशारा करती है, जो अवैध रास्तों से विदेश जाने वाले युवाओं को उठाने पड़ते हैं। परिवार न केवल अपने इकलौते बेटे को खोने के दुख में डूबा है, बल्कि भारी कर्ज के बोझ तले भी दब गया है।










