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Faridabad ki local news : बिहार के अररिया से फरीदाबाद आए महादेव ऋषिदेव करीब 30 साल से यहां खेती कर रहे हैं. इस बार एक एकड़ में गोभी उगाने के लिए 40 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं. पहले ही 25-30 हजार रुपये का नुकसान हो गया. अब दोबारा फसल लगाई है. लोकल 18 से महादेव बताते हैं कि मैंने एक एकड़ जमीन में जो गोभी लगाई थी, वो पहले ही खराब हो गई. कमाई से पहले नुकसान शुरू हो गया. वे कहते हैं कि खाद और दूसरे सामान पर करीब 24 हजार रुपये खर्च हुए हैं. मजदूरों पर भी 5 से 10 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है. इस तरह पूरी खेती का खर्च 40 हजार तक आया है.
फरीदाबाद. किसान बड़ी उम्मीद के साथ फसल की बुवाई करता है कि इस बार अच्छी कमाई होगी. कई किसान तो अपने राज्य में खेती से फायदा नहीं होने पर दूसरे राज्य में आकर भी मेहनत करते हैं. उन्हें लगता है कि यहां खेती करेंगे तो कुछ बचत हो जाएगी, लेकिन खेती में कभी मौसम की मार तो कभी फसल के सही रेट नहीं मिलने का दंश हर जगह एक जैसा है. कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं. फसल खराब होने पर उनकी मुसीबत दोगुनी हो जाती है. ऐसा ही बिहार के अररिया जिले से फरीदाबाद आए किसान महादेव ऋषिदेव के साथ हुआ. महादेव पिछले 30 साल से यहां खेती कर रहे हैं. लोकल 18 से वे बताते हैं कि मैंने एक एकड़ जमीन में गोभी लगाई थी. खेत तैयार करने से लेकर बीज खरीदने, खाद डालने, दवा का छिड़काव करने और सिंचाई तक में काफी मेहनत करनी पड़ी. इसके बावजूद फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई. पहले गोभी की बुवाई में नुकसान हुआ. इसके बाद दोबारा बीज खरीदकर खेत में गोभी लगाई. पहली बार हुए नुकसान को मिलाकर 25 से 30 हजार रुपये का घाटा हो गया है. अब दोबारा खेती करने में भी खर्च करना पड़ रहा है.
दो महीने में होगी तैयार
महादेव ऋषिदेव कहते हैं कि खेती में पहले ही काफी पैसा लग चुका है. अब दोबारा गोभी लगाने के लिए बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करना पड़ रहा है. खाद और दूसरे सामान पर करीब 24 हजार रुपये खर्च हुए हैं. मजदूरों पर भी करीब 5 से 10 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है. इस तरह पूरी खेती का खर्च करीब 40 हजार रुपये तक आया है. इतनी मेहनत और खर्च के बाद भी यह भरोसा नहीं है कि इस बार फसल से कितना फायदा होगा. महादेव ऋषिदेव के मुताबिक खेत में दोबारा लगाई गई गोभी तैयार होने में अभी करीब दो महीने का समय लगेगा. इसके लिए खेत की पांच से छह बार जुताई की गई है. खाद डालने और सिंचाई करने में भी काफी मेहनत लगी है. अब कुछ उम्मीद है कि इस बार फसल अच्छी होगी और मंडी में सही रेट मिल जाएगा. अभी दुकानों पर गोभी करीब 40 रुपये किलो बिक रही है, जबकि मंडी में किसानों को करीब 20 से 22 रुपये किलो का भाव मिलता है.
काफी मुश्किलों में जिंदगी
महादेव ऋषिदेव जैसे किसान खेतों में दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनकी अपनी जिंदगी काफी मुश्किलों में गुजरती है. फरीदाबाद में खेत के पास ही उनका छोटा सा घर है. आज के समय में गैस होने के बावजूद वह चूल्हे पर खाना बनाते हैं. रहने के लिए भी ज्यादा जगह नहीं है. एक छोटे से बरामदे में खटिया डालकर ऊपर चादर की छत बनाई हुई है, वहीं अपनी पत्नी के साथ रहते हैं. खेती से कमाई की उम्मीद में वह हर दिन मेहनत कर रहे हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…










