हरियाणा में एक विवादित बयान ने सरकारी सिस्टम को हिला दिया और अब कार्रवाई भी उतनी ही तेज दिखी है। सोनीपत में तैनात बिजली निगम के एसई को लेकर उठे विवाद के बाद आखिरकार सरकार को कदम उठाना पड़ा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई दबाव के बाद हुई या शुरुआत में ही सख्ती दिखाई जानी चाहिए थी।
UHBVNL के तहत कार्यरत एसई गीतू राम तंवर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निगम के एमडी की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब उनका मुख्यालय पंचकूला रहेगा।
पूरा मामला एक वायरल वीडियो के बाद सामने आया, जिसमें अधिकारी एक आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद न सिर्फ विभाग के अंदर से शिकायतें आईं, बल्कि सामाजिक संगठनों ने भी कड़ा विरोध शुरू कर दिया।

शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारी कर्मचारियों पर गलत बिजली बिल बनाने का दबाव डाल रहे थे। इससे पहले ही विभाग में उनके व्यवहार को लेकर नाराजगी थी, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
इस बीच रोहतक में जाट समाज से जुड़े संगठनों ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया। जाट सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र जागलान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी इस तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
विरोध बढ़ने के बाद अधिकारी ने मीडिया के सामने सफाई देते हुए बयान को मजाक बताया, लेकिन यह दलील विवाद को शांत नहीं कर सकी। लगातार बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार विभाग ने उन्हें सस्पेंड करने का फैसला लिया।
फिलहाल यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब इसमें प्रशासनिक कार्यशैली और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या केवल सस्पेंशन तक ही कार्रवाई सीमित रहती है या कोई और सख्त निर्णय भी लिया जाता है।













