अंबाला: दशहरे पर जब रामबाग ग्राउंड में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होगा, तो उसके पीछे कई दिनों की मेहनत और एक परिवार की पीढ़ियों पुरानी विरासत भी होगी. दरअसल अंबाला कैंट की कुम्हार मंडी में इन दिनों दशहरे की तैयारियां जोरों पर हैं. यहां मेरठ से आए मुस्लिम कारीगर मोहम्मद वकील अपनी टीम के साथ रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार कर रहे हैं. खास बात यह है कि वकील ने कभी यूपी पुलिस में दरोगा की नौकरी हासिल की थी, लेकिन दोस्ती और पुश्तैनी काम के प्रति लगाव ने उन्हें एक अलग रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया. आज 65 साल से ज्यादा पुरानी दोस्ती की यादें और तीन से अधिक पीढ़ियों की कारीगरी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं.
लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए मोहम्मद वकील ने बताया कि वह पिछले 27 वर्षों से दशहरे पर रावण के पुतले बनाने के लिए अंबाला आ रहे हैं. उनसे पहले उनके पिता और दादा भी इसी काम से जुड़े हुए थे. उन्होंने कहा कि आतिशबाजी और पुतले बनाना उनके परिवार का पुश्तैनी काम है. इस बार भी वह करीब 10 से 12 कारीगरों की टीम के साथ अंबाला पहुंचे हैं.
25 दिनों से तैयार कर रहे रावण का पुतला
उन्होंने बताया कि पिछले 25 दिनों से पुतले तैयार करने और आतिशबाजी के काम में जुटे कारीगर अब दशहरे के आयोजन के लिए अंतिम तैयारियां कर रहे हैं. वहीं मोहम्मद वकील के अनुसार, अंबाला में चार जगहों पर उनकी टीम के लोग रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बना रहे हैं. उनका कहना है कि लोगों को हर साल उनका काम पसंद आता है और यही बात उन्हें इस परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है.
दोस्ती के खातिर छोड़ी सरकारी नौकरी
वहीं मोहम्मद वकील की जिंदगी का सबसे दिलचस्प पहलू उनकी दोस्ती है. उन्होंने बताया कि वह हाईस्कूल तक पढ़े हैं और उनकी यूपी पुलिस में दरोगा के पद पर नौकरी भी लग गई थी. लेकिन नौकरी शुरू करने के करीब चार महीने बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया. वकील के अनुसार, बचपन से उनका एक दोस्त उनके साथ रहा था. दोनों की दोस्ती को अब 65 साल से अधिक हो चुके हैं. जब वकील नौकरी पर गए, तो उनका दोस्त अकेलापन महसूस करने लगा ओर वह उनसे कहता था कि उनके नौकरी पर जाने के बाद उसका मन नहीं लगता.
वकील बताते हैं कि उस दौर में उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों एक-दूसरे को अपनी जिंदगी का हिस्सा मानते थे. आखिरकार उन्होंने दोस्ती और अपने पुश्तैनी काम को प्राथमिकता दी. आज वह उसी काम को पूरी लगन से निभा रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि जिंदगी में हर फैसला केवल कमाई या नौकरी के आधार पर नहीं होता, कई बार रिश्ते और अपनी पहचान भी इंसान के लिए उतने ही मायने रखते हैं.
अंबाल में तैयार हो रहा 40 हजार का पुतला
वकील ने बताया कि बड़े पुतले तैयार करने में करीब 20 से 30 दिन तक लग जाते हैं. सामान्य तौर पर बड़े रावण की कीमत 5 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है, जबकि इस बार अंबाला में तैयार किए जा रहे कुछ पुतलों की लागत करीब 30 से 40 हजार रुपये बताई गई है. दशहरे के लिए 45, 50 और 55 फुट तक के पुतले तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
वकील साल में दशहरे के दौरान पुतले बनाते हैं, जबकि बाकी समय शादियों, फिल्मों और नाटकों में आतिशबाजी का काम करते हैं. उनका कहना है कि जब तक शरीर साथ देगा, वह इस काम को जारी रखेंगे. हालांकि, उन्हें इस बात का मलाल है कि नई पीढ़ी अब इस पारंपरिक पेशे में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही.







