पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के पलवल विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की उनकी मांग को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही, कांग्रेस नेता करण सिंह दलाल द्वारा दायर याचिका, जिसमें गौतम पर धार्मिक आधार पर वोट मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, का नियमित ट्रायल जारी रहेगा।
क्या हैं याचिका में आरोप?
करण सिंह दलाल, जो पलवल-84 सीट से गौरव गौतम के खिलाफ चुनाव लड़े थे, ने अपनी याचिका में प्रमुख आरोप लगाए हैं:
धार्मिक आधार पर वोट मांगना: आरोप है कि अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान गौरव गौतम और उनके समर्थकों ने “सांप्रदायिक अपीलें” कीं और धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए किया।
वीडियो और फोटो प्रमाण: याचिका में दावा किया गया है कि गौतम ने कई धार्मिक आयोजनों में स्वयं मंच साझा कर मतदाताओं से वोट मांगे। इन आयोजनों के वीडियो और फोटोग्राफ को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया गया, जिन्हें याचिका के साथ पेन ड्राइव के रूप में प्रमाण के तौर पर पेश किया गया है।
चुनाव आयोग को शिकायत: याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर चुनाव आयोग ने भी गौतम को इस मामले में नोटिस जारी किया था।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की गौतम की दलील?
मंत्री गौरव गौतम ने अदालत से दलील दी थी कि चुनाव याचिका में कोई ठोस तथ्य नहीं हैं और इसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।
हालांकि, जस्टिस अर्चना पुरी की पीठ ने अपने 21 पन्नों के फैसले में इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि याचिका में “मटेरियल फैक्ट्स” (तथ्यात्मक सामग्री) का उल्लेख किया गया है, जिसमें धार्मिक आयोजनों, वीडियो, स्थान, तिथि और परिस्थितियों का विवरण शामिल है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो और दस्तावेजों की प्रामाणिकता और साक्ष्य मूल्य का आकलन नियमित सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है। साथ ही, चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हुए ‘सनातन’ या ‘हिंदुत्व’ जैसे शब्दों के अर्थ और प्रभाव का मूल्यांकन भी गवाहियों के आधार पर ट्रायल में ही होगा।
आगे क्या है प्रक्रिया?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, अब मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। करण सिंह दलाल ने अदालत से गौरव गौतम का चुनाव रद्द करने और उन्हें 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की है। अब यह ट्रायल के बाद ही तय हो पाएगा कि पलवल सीट पर राजनीतिक भविष्य क्या होगा।













