चंडीगढ़, [आज का दिनांक]: हरियाणा में पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने आधिकारिक तौर पर हिसार को IIT के लिए प्रस्तावित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक विजन डॉक्यूमेंट सौंपा है। गंगवा के इस कदम ने IIT को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों के बीच चल रही ‘लॉबीिंग’ को नई गति दे दी है।
हिसार के पक्ष में क्या है मजबूत दावा?
मंत्री रणबीर गंगवा ने अपने प्रस्ताव में हिसार के लिए कई ठोस तर्क रखे हैं:
विशाल सरकारी जमीन: उन्होंने बताया कि हिसार के राजकीय पशुधन फार्म (GLF) के पास 10,000 एकड़ से अधिक खाली सरकारी जमीन उपलब्ध है। इसका मतलब है कि सरकार को IIT के लिए आवश्यक 300 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा।
शैक्षणिक और बुनियादी ढांचा: हिसार में पहले से ही हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय और लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (LUVAS) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं, जो एक शैक्षणिक क्लस्टर बनाते हैं।
उत्कृष्ट कनेक्टिविटी: महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट की मौजूदगी और राजस्थान व पंजाब से अच्छी सड़क कनेक्टिविटी हिसार को रणनीतिक लाभ देती है।
अन्य प्रमुख दावेदार कौन हैं?
हरियाणा के पहले IIT के लिए कई अन्य जिले भी मजबूती से दावा पेश कर रहे हैं:
करनाल: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का संसदीय क्षेत्र होने और GT रोड पर स्थित होने के कारण मजबूत दावेदार है। हालाँकि, इसकी राजस्थान से कनेक्टिविटी कमजोर है।
गुरुग्राम: केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के क्षेत्र में आता है, लेकिन दिल्ली में पहले से IIT होने से इसकी संभावना कम हो सकती है।
कुरुक्षेत्र: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गृह जिला होने और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की मौजूदगी इसे एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनाती है।
भिवानी: सांसद धर्मबीर और राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी की सक्रिय लॉबीिंग के चलते इसकी दावेदारी भी मजबूत है।
अगला कदम क्या है?
केंद्र सरकार पहले ही हरियाणा में IIT की सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। अब मुख्यमंत्री सैनी के सामने प्रदेश के हित में एक रणनीतिक फैसला लेने की चुनौती है। जमीन की उपलब्धता और समग्र बुनियादी ढांचे को देखते हुए, मंत्री गंगवा द्वारा रखा गया हिसार का प्रस्ताव वर्तमान में सबसे मजबूत और किफायती विकल्प प्रतीत होता है। इस प्रोजेक्ट से हरियाणा के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के छात्रों को भी लाभ मिलेगा।












