जस्टिस सूर्यकांत आज देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में कार्यभार संभालते हुए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं। वह हरियाणा राज्य से इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले प्रथम व्यक्ति हैं। सुबह राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक समारोह में जस्टिस सूर्यकांत का पूरा परिवार और उनके गांव के लोग शामिल हुए।
पारिवारिक उत्साह और गौरव का क्षण
जस्टिस सूर्यकांत का परिवार इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरे उत्साह के साथ दिल्ली पहुंचा था। उनके बड़े भाई डॉ. शिवकांत ने बताया, “शपथ ग्रहण समारोह में पूरे परिवार को बुलाया गया है। तीनों भाई, उनकी पत्नियां, बच्चे, बेटी-दामाद, बहन का परिवार, गांव के लोग और पिता के मित्र सभी यहां मौजूद हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि तीनों भाई और उनके परिवार राष्ट्रपति के साथ होने वाले भोज में भी शामिल होंगे।
हिसार में हर्षोल्लास और आयोजन
वहीं, CJI के गृहनगर हिसार और उनके पैतृक गांव पेटवाड़ में यह समाचार आते ही खुशी की लहर दौड़ गई। हिसार की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने हवन यज्ञ और रक्तदान शिविर का आयोजन कर उनके कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। ढोल बजाकर और मिठाई बांटकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया गया। बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट संदीप बूरा ने बताया कि 136 वकीलों के एक दल को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए विशेष निमंत्रण दिया गया था।
हिसार से गहरा नाता और सादगी भरा जीवन
जस्टिस सूर्यकांत का हिसार से गहरा भावनात्मक और पेशेवर रिश्ता रहा है।
पैतृक गांव पेटवाड़: CJI बनने से ठीक पहले दिवाली पर वह बिना किसी भव्य स्वागत के अपने पैतृक गांव पेटवाड़ में अपने परिवार के साथ ठहरे थे। उनका पूरा कुनबा आज भी इसी गांव में रहता है।
वकालत की शुरुआत: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1984-85 में हिसार जिला न्यायालय में एक वकील के रूप में की थी और यहां लगभग 6 महीने तक प्रैक्टिस की। उन्होंने हिसार के वरिष्ठ वकील स्वर्गीय आत्माराम बंसल के साथ जूनियर के तौर पर काम किया।
सादा जीवन: उनके बड़े भाई शिवकांत के अनुसार, CJI बन चुके सूर्यकांत आज भी सादा जीवन को तरजीह देते हैं। उन्हें बाजरे की रोटी (मिसी रोटी), लहसुन की चटनी, लस्सी और मूंग की दाल विशेष रूप से पसंद है।
शिक्षा: उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से और ग्रेजुएशन हिसार के सरकारी कॉलेज से पूरी की। परिवार में अधिकतर शिक्षक होने के बावजूद उन्होंने कानून की राह चुनी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक सरोकार
जस्टिस सूर्यकांत के पिता स्वर्गीय मदन गोपाल संस्कृत के शिक्षक और प्रतिष्ठित साहित्यकार थे, जिन्होंने हरियाणवी में रामायण लिखी और कई पुरस्कार प्राप्त किए। CJI सूर्यकांत भी सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं और अपने परिवार के एनजीओ के माध्यम से गांव के 10वीं और 12वीं के टॉपर छात्रों को हर साल सम्मानित करते हैं।
आज का दिन न केवल जस्टिस सूर्यकांत और उनके परिवार, बल्कि पूरे हरियाणा राज्य के लिए गौरव और प्रेरणा का दिन है।













