हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के बेटे और भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रियता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट शेयर कर उन्होंने साफ संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में वे राजनीति में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं।
बिश्नोई की यह पोस्ट 2 दिसंबर के संदर्भ में की गई है, जो उनकी पुरानी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) का स्थापना दिवस था। इसके बाद से प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
“2 दिसंबर मेरे लिए भावुक स्मृति” — सोशल मीडिया पोस्ट से राजनीतिक चर्चा गर्म
कुलदीप बिश्नोई ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“2 दिसंबर मेरे जीवन का वह दिन है जिसे शब्दों में बांध पाना आसान नहीं। यह तारीख मेरे दिल में एक भावुक स्मृति के रूप में हमेशा अंकित रहती है।”
पोस्ट में उन्होंने अपनी पुरानी रैलियों की झलक भी साझा की और लिखा कि उस दिन केवल भीड़ नहीं, बल्कि लोगों का विश्वास और प्रेम उनके साथ था।
उन्होंने आगे लिखा:
“आप सभी के विश्वास और आशीर्वाद से मैं आगे बढ़ता हूं और वादा करता हूं कि आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए निरंतर समर्पित रहूंगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट केवल यादों का उल्लेख नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी है।
बड़ी रैली की तैयारी, तारीख का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, बिश्नोई नई साल की शुरुआत में एक बड़ी राजनीतिक रैली करने की तैयारी में हैं। हालांकि तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि यह शक्ति प्रदर्शन उनके भविष्य की राजनीति तय करेगा।
यह रैली ऐसे समय में प्रस्तावित है जब:
अप्रैल 2026 में कोटा राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल पूरा हो रहा है
भाजपा में नया प्रदेशाध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया भी चल रही है
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिश्नोई इस रैली के जरिए भाजपा नेतृत्व को अपनी संगठनात्मक ताकत और जन समर्थन दिखाना चाहते हैं।
कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक सफर: कांग्रेस से भाजपा तक
कुलदीप बिश्नोई की राजनीतिक यात्रा काफी रोमांचक रही है।
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 2007 | भजनलाल ने कांग्रेस छोड़कर हजकां बनाई |
| 2011 | भजनलाल के निधन के बाद बिश्नोई ने पार्टी की कमान संभाली |
| 2014 | भाजपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा |
| 2016 | हजकां का कांग्रेस में विलय |
| 2022 | कांग्रेस से नाराज होकर भाजपा में शामिल हुए |
दलबदल कानून की बड़ी जीत
2009 विधानसभा चुनाव में हजकां ने 6 सीटें जीती थीं। बाद में इनमें से 5 विधायक कांग्रेस में चले गए, जिसके चलते बिश्नोई ने दलबदल कानून के तहत याचिका दायर की। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अक्टूबर 2014 में हाईकोर्ट ने पांचों विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी।
यह फैसला बिश्नोई की सबसे बड़ी राजनीतिक जीतों में गिना जाता है।
16 साल से सत्ता से बाहर बिश्नोई परिवार
बिश्नोई परिवार 2008 के बाद से सत्ता से दूर है। 2005–2008 में चंद्रमोहन बिश्नोई हरियाणा के उपमुख्यमंत्री रहे, लेकिन उसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलती चली गईं।
पिछले विधानसभा चुनाव में आदमपुर से मिली हार ने परिवार को फिर सत्ता से दूर कर दिया।
समर्थक वापस लौट रहे, गुटबाज़ी की राजनीति में नया मोड़
सूत्रों के अनुसार अब कई पुराने नेता और पूर्व पदाधिकारी जो कांग्रेस में चले गए थे, वे अब दोबारा बिश्नोई के संपर्क में हैं। इनमें नरेश जांगड़ा और सुरेंद्र बेदी जैसे नाम शामिल हैं।
क्या भाजपा में बढ़ेगी बिश्नोई की भूमिका?
कुलदीप बिश्नोई के हालिया संकेतों को कई सवालों से जोड़ा जा रहा है:
क्या वे राज्यसभा के प्रबल दावेदार हैं?
क्या वे हरियाणा भाजपा की नई नेतृत्व टीम में जगह मांग रहे हैं?
या फिर राज्य की राजनीति में नया समीकरण तैयार कर रहे हैं?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि हरियाणा की राजनीति में बिश्नोई की वापसी चर्चा का केंद्र बन चुकी है।













