टीबी से पीड़ित 78 वर्षीय बुजुर्ग घर जाने के लिए गिड़गिड़ाता रहा, पत्नी-बेटा-बेटी ने मुंह मोड़ा, बोले- मर जाए तो बता देना

On: October 18, 2026 10:36 AM
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करनाल के इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग की उम्र 78 साल है. वह पिछले करीब 23 साल से अपने परिवार से अलग रह रहे थे. करीब 15 वर्ष तक वह रिक्शा चलाकर अपना पेट पालते रहे. बाद में उम्र और बीमारी ने उन्हें असहाय बना दिया. ढलती उम्र और टीबी से पीड़ित होने के कारण वह किसी तरह अपना गुजारा नहीं कर पा रहे थे. इसी कारण करीब 6 महीने पहले आश्रम ने उन्हें अपने यहां शरण दी थी. तबीयत बिगड़ने पर भी उन्होंने अपने परिवार को अपनी इच्छा से आश्रम के माध्यम से बुलवाया था. अपनी पत्नी, बेटे और बेटी को देखकर बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए.

टीबी से पीड़ित 78 वर्षीय बुजुर्ग घर जाने के लिए गिड़गिड़ाता रहा, मुंह मोड़ेZoom

वृद्धाश्रम की सांकेतिक तस्वीर

करनालः आज के दौर में रिश्ते कितने निष्ठुर हो चुके हैं, इसकी दर्दनाक तस्वीर करनाल के सुभद्रा मानव कल्याण सेवा संस्थान में देखने को मिली. यहां रह रहे 78 वर्षीय बुजुर्ग से मिलने 23 साल बाद उसका परिवार पहुंचा, लेकिन बुजुर्ग को घर ले जाने की बजाय परिवार ने आश्रम संचालक से कहा कि ‘बीमार आदमी को साथ नहीं ले जा सकते, मर जाए तो बता देना, अंतिम संस्कार कर देंगे.

78 साल की उम्र 23 साल से परिवार अलग रह रहे थे

जानकारी के अनुसार करनाल के इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग की उम्र 78 साल है. वह पिछले करीब 23 साल से अपने परिवार से अलग रह रहे थे. करीब 15 वर्ष तक वह रिक्शा चलाकर अपना पेट पालते रहे. बाद में उम्र और बीमारी ने उन्हें असहाय बना दिया. ढलती उम्र और टीबी से पीड़ित होने के कारण वह किसी तरह अपना गुजारा नहीं कर पा रहे थे. इसी कारण करीब 6 महीने पहले आश्रम ने उन्हें अपने यहां शरण दी थी. तबीयत बिगड़ने पर भी उन्होंने अपने परिवार को अपनी इच्छा से आश्रम के माध्यम से बुलवाया था. अपनी पत्नी, बेटे और बेटी को देखकर बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने परिवार के सामने हाथ जोड़कर घर ले चलने की गुहार लगाई. लेकिन परिवार का दिल नहीं पिघला. बताया जा रहा है कि बुजुर्ग की पत्नी, दो बेटियां और बेटा उनसे मिलने पहुंचे थे. परिजनों ने साफ कहा कि वह बीमार व्यक्ति को अपने साथ नहीं रख सकते. आश्रम के संचालक नीलू ने बताया कि उन्होंने परिजनों को काफी समझाने का प्रयास किया. जिंदगी के अंतिम पड़ाव में उन्हें घर ले चलने को कहा.

बेटा और बेटी पहले से नहीं दे रहे साथ

संस्थान की ओर से हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया, लेकिन परिजनों ने बीमारी को बहाना बनाकर साथ ले जाने से साफ इनकार कर दिया. परिवार में पत्नी व बड़ी बेटी का कहना था कि छोटा बेटा और बेटी पहले से ही साथ नहीं दे रहे, क्योंकि घर में खुद के खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. ऊपर से बीमार बुजुर्ग की जिम्मेदारी उठाना उनके बस में नहीं है. उन्होंने आश्रम संचालक को अपना नंबर देते हुए कहा कि अगर कुछ हो जाए तो सूचना दे देना. इस घटना के बाद आश्रम में मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं. संचालक ने कहा कि यह समाज के लिए एक कड़वा सच है, जहां अपने ही अपनों से मुंह मोड़ रहे हैं. फिलहाल बुजुर्ग का आश्रम में ही इलाज चल रहा है और संस्था ही उनकी देखभाल कर रही है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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