हरियाणा में छोटे और मध्यम स्तर की फैक्ट्रियों तथा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब इन कर्मचारियों को भी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के स्वास्थ्य लाभ मिल सकेंगे। इसके लिए नियोक्ता अपनी मर्जी से ESI निगम में पंजीकरण करा सकते हैं और उन पर कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या की कोई बाध्यता नहीं होगी।
किन क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए है अनिवार्य?
राज्य सरकार ने कुछ खास तरह के उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए ESI कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। इनमें शामिल हैं:
क्रेशर जोन
टाइल उद्योग
कोयला बेचने/बनाने वाले
सीमेंट उद्योग
इन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को अक्सर कुछ ही महीनों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं। ESI कार्ड मिलने से उन्हें ESI डिस्पेंसरी और अस्पतालों में समय रहते इलाज मिल सकेगा और उनके स्वास्थ्य पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
क्या है ESI कार्ड और कैसे मिलेगा लाभ?
ESI एक सामाजिक सुरक्षा योजना है जो पंजीकृत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करती है।
योगदान: इस योजना के तहत, नियोक्ता कर्मचारी की वेतन का 3.25% और कर्मचारी स्वयं अपने वेतन का 0.75% ESIC के खाते में योगदान के रूप में जमा करता है।
लाभ: इसी योगदान के आधार पर कर्मचारी और उसके परिवार को बीमारी, प्रसूति, अस्थायी विकलांगता आदि की स्थिति में निःशुल्क चिकित्सा लाभ और नकद भुगतान मिलता है।
10 से कम कर्मचारी वाली फैक्ट्री भी करा सकती है पंजीकरण
नए नियमों के तहत, अब उन फैक्ट्रियों या प्रतिष्ठानों पर भी कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या की बाध्यता खत्म कर दी गई है, जहां 10 या उससे भी कम कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे सभी छोटे इकाइयां भी अपने कर्मचारियों का ESI पंजीकरण करवा सकती हैं।
कर्मचारियों तक पहुंचेगी जानकारी
ESIC, हरियाणा के क्षेत्रीय निदेशक सुगन लाल मीणा ने बताया कि इस योजना के बारे में श्रमिकों और नियोक्ताओं तक जानकारी पहुंचाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वेक्षण किए जाएंगे और कार्ड बनवाने की प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाएगी।
बताया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा चार नए श्रम संहिता लागू करने के बाद ही ESIC ने राज्य में अपने कार्डधारकों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। वर्तमान में हरियाणा में लगभग 30 लाख ESI कार्डधारक हैं। यह निर्णय राज्य के लाखों असंगठित और छोटे उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।













