क्या अल फलाह यूनिवर्सिटी बंद होगी? Haryana Govt के फैसले पर टिका छात्रों का भविष्य ?

On: November 23, 2025 3:42 AM
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फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। दिल्ली धमाके मामले के बाद जहां जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ी है, वहीं यूनिवर्सिटी के प्रबंधन और मान्यता को लेकर कई संस्थाएं भी सक्रिय हो गई हैं। ब्लास्ट से जुडे कई अहम सुराग के बाद डा व उनकी पत्नी व बेटी को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब सवाल यह है कि क्या हरियाणा सरकार इस अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करेगी या नहीं । जानिए आगे क्या होगा।Haryana Govt

अल-फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित यह यूनिवर्सिटी 2014 में हरियाणा विधानसभा में पारित बिल के जरिए स्थापित हुई थी, जबकि 2015 में यूजीसी ने इसे मान्यता प्रदान की। दिल्‍ली के लाल किला के सामने हुए ब्‍लास्‍ट के तार जिस अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, क्‍या उसमें ताला लग जाएगा? इस ब्‍लास्‍ट का सुसाइड बॉम्‍बर डॉक्‍टर उमर नबी इसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करता था. इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई और डॉक्‍टर भी दिल्‍ली ब्‍लास्‍ट मामले से जुड़ हैं.

जानिए कब मिली थी मान्यता: बता दे कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी एवं मेडिकल कॉलेज 2019 में मान्यता प्राप्त कर चुका है। इससे पहले यही ट्रस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज चलाता था और वर्तमान में इसके अधीन आधा दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं।

यूनिवर्सिटी के खिलाफ अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यापन परिषद (NAAC) की ओर से नोटिस के रूप में सामने आई है। NAAC ने संस्था पर फर्जी प्रमाणन का गंभीर आरोप लगाते हुए सात दिन के भीतर जवाब मांगा है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला तो यूजीसी और सरकार को मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।

किसके पास रद्द करने का अधिकार: बतर दे कि यूनिवसीटी को लेकर NAAC के पास स्वयं मान्यता रद्द करने का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता वापस ले ली है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को AIU का लोगो इस्तेमाल करने से भी रोक दिया गया है। इस निर्णय ने संस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रभाव डाला है।

हरियाण सरकार पर टिकी निगाहें: बतर दे कि हरियाणा सरकार ने फिलहाल कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकार जल्द ही बैठक बुलाने वाली है, जिसमें यूनिवर्सिटी को आवंटित 70 एकड़ भूमि और अन्य संबंधित मामलों पर चर्चा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना विधानसभा में बिल पारित कर की गई थी, ऐसे में इसकी मान्यता रद्द करने के लिए भी सरकार को विधानसभा में नया बिल लाना होगा।

इसी बीच यूजीसी के पास भी यह अधिकार है कि वह अपनी सिफारिश पर मान्यता समाप्त कर दे या फिर यूनिवर्सिटी का पूरा सत्र स्थगित कर दे। इस पूरे मामले पर अगला कदम सरकार और यूजीसी के निर्णय पर निर्भर करेगा।

 

एनएमसी ने साफ कहा है कि जो भी कार्रवाई होगी, उसका असर मेडिकल छात्रों के भविष्य पर किसी भी तरीके से नहीं पड़ेगा. आयोग ने आश्वासन दिया है कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन जैसी चीजों को भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि नए सत्र में दाखिला के लिए छात्रों को कहीं और शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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