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Faridabad ki local news : फरीदाबाद में दुर्गा पूजा के लिए 11 फीट ऊंची और 17 फीट लंबी भव्य प्रतिमा तैयार की जा रही है. इसे बनाने में 6 महीने और चार तरह की मिट्टी लगेगी. करीब 5 क्विंटल वजनी इस प्रतिमा की कीमत 2 लाख रुपये है. इसे गाजियाबाद भेजा जाएगा. लोकल 18 से मूर्ति कलाकार प्रदीप दास बताते हैं कि इतनी बड़ी मां दुर्गा की प्रतिमा पहली बार बना रहा हूं. त्योहार नजदीक आते ही ऑर्डर भी लगातार बढ़ रहे हैं. हमारे पास पूरे दिल्ली-एनसीआर से ऑर्डर आते हैं. महीनों की मेहनत, बारीक कारीगरी और मिट्टी की खुशबू से तैयार होने वाली ये प्रतिमाएं सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं होतीं बल्कि कलाकारों की कला, धैर्य और परंपरा की पहचान भी हैं.
फरीदाबाद. त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगती है, लेकिन इस रौनक के पीछे कुछ ऐसे कलाकार भी हैं जो महीनों की मेहनत से त्योहारों को खूबसूरती देते हैं. गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा से पहले फरीदाबाद में मूर्तियों को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है. मिट्टी, बांस, रंग और बारीक कारीगरी से मां दुर्गा की ऐसी भव्य प्रतिमा तैयार की जा रही है, जिसे देखकर हर कोई ठहर जाता है. इस बार 11 फीट ऊंची और 17 फीट लंबी दुर्गा प्रतिमा बनाई जा रही है, जिसे तैयार होने में पूरे छह महीने लगेंगे. लोकल 18 से मूर्ति कलाकार प्रदीप दास बताते हैं कि मैं 38 साल से मूर्तियां बना रहा हूं, लेकिन इतनी बड़ी मां दुर्गा की प्रतिमा पहली बार बनाने में लगा हूं. इसकी ऊंचाई 11 फीट और लंबाई 17 फीट है. यह प्रतिमा गाजियाबाद के लिए बनाई जा रही है. अप्रैल महीने से इसका काम शुरू किया था और इसे पूरी तरह तैयार होने में अक्टूबर तक का समय लगेगा.
सभी कारीगर बंगाल से
प्रदीप दास बताते हैं कि इस प्रतिमा को बनाने में सिर्फ एक तरह की मिट्टी नहीं लगती. यमुना की मिट्टी, खेत की मिट्टी और चिकनी मिट्टी समेत करीब चार तरह की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है. पहले बांस से पूरा ढांचा तैयार किया जाता है, फिर उस पर अलग-अलग परतों में मिट्टी चढ़ाई जाती है. हर परत को सूखने के बाद ही अगला काम शुरू होता है, तभी प्रतिमा मजबूत बनती है. इस प्रतिमा को तैयार करने में पांच कारीगर लगातार काम कर रहे हैं और सभी कारीगर पश्चिम बंगाल से आए हैं. रंगाई के लिए वाटर कलर का इस्तेमाल किया जाता है. सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि मां दुर्गा के बाल, गहने और सजावट का पूरा सामान भी कोलकाता से मंगाया जाता है ताकि प्रतिमा पारंपरिक बंगाली शैली में तैयार हो सके.
एक साथ 20 मूर्तियों पर काम
प्रदीप दास बताते हैं कि इस 11 फीट ऊंची प्रतिमा का वजन करीब पांच क्विंटल होगा. इसकी कीमत करीब 2 लाख रुपये है. हालांकि हमारे यहां छोटी मूर्ति की शुरुआत 50 हजार रुपये से हो जाती है. इस समय हमारी कार्यशाला में करीब 20 मूर्तियों पर काम चल रहा है और हर मूर्ति ग्राहक की मांग के हिसाब से अलग डिजाइन में बनाई जाती है. त्योहार नजदीक आते ही ऑर्डर भी लगातार बढ़ रहे हैं. प्रदीप दास बताते हैं कि हमारे पास पूरे दिल्ली-एनसीआर से ऑर्डर आते हैं. गाजियाबाद, राजस्थान और फरीदाबाद के अलग-अलग इलाकों से भी लोग प्रतिमाएं बनवाने के लिए संपर्क करते हैं.
सभी नहीं देख पाते मेहनत
प्रदीप के मुताबिक, जैसे-जैसे दुर्गा पूजा और दशहरा करीब आते हैं, काम और तेज हो जाता है. महीनों की मेहनत, बारीक कारीगरी और मिट्टी की खुशबू से तैयार होने वाली ये प्रतिमाएं सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं होतीं बल्कि कलाकारों की कला, धैर्य और परंपरा की पहचान भी हैं. जब दुर्गा पूजा के पंडालों में ये भव्य प्रतिमाएं सजती हैं तब लोगों को सिर्फ मां दुर्गा का स्वरूप दिखाई देता है लेकिन उसके पीछे छिपे कठिन परिश्रम को बहुत कम लोग देख पाते हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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