हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में वर्षों से लंबित भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं का असर अब साफ तौर पर नजर आने लगा है। राज्य के अलग-अलग विभागों में क्लर्क के कुल 6,246 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन रिक्त पदों के कारण न केवल प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया रुकी रहने से कर्मचारी वर्ग में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है।
रविवार को हरियाणा ग्रुप डी संघर्ष समिति के राज्य प्रधान सत्यवान सहरावत ने प्रेसवार्ता के दौरान सरकार और मानव संसाधन विभाग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्लर्क पदों की भारी कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्यभार उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और कार्य गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। कई कर्मचारी वर्षों का अनुभव रखने के बावजूद प्रमोशन से वंचित हैं, जिससे उनमें निराशा और रोष बढ़ता जा रहा है।
सत्यवान सहरावत ने बताया कि ग्रुप डी कर्मचारियों की पदोन्नति का मुद्दा बार-बार सरकार और मानव संसाधन विभाग के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो सीनियरिटी लिस्ट जारी की गई है और न ही पदोन्नति से जुड़ी कोई स्पष्ट प्रक्रिया शुरू हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से फाइलें अटकी हुई हैं, जबकि विभागों में स्टाफ की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि क्लर्क के खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए और पदोन्नति प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से शुरू किया जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इससे न केवल सरकारी कामकाज प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दबाव और कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।













