हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रदेशवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई। नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और अंत्योदय (AAY) राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब पात्र परिवारों को न तो सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही किसी प्रकार का आवेदन जमा करना पड़ेगा। सरकार स्वयं डिजिटल डेटा के आधार पर राशनकार्ड तैयार कर रही है।
विधानसभा में कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के सवाल के जवाब में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से राज्य में BPL और AAY राशनकार्डों के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की जा चुकी है, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया स्वत: और पारदर्शी हो गई है। अब राशनकार्ड प्रबंधन फैमिली आईडी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) डेटाबेस से सीधे जुड़ा हुआ है।
सरकार के अनुसार यदि किसी परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है, तो वह स्वत: BPL श्रेणी में शामिल हो जाता है। इसके लिए किसी भी तरह का फॉर्म भरने, दस्तावेज जमा कराने या विभागीय सत्यापन की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। फैमिली आईडी में दर्ज आय डेटा के आधार पर सिस्टम स्वयं पात्रता तय करता है और राशनकार्ड जनरेट हो जाता है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बीपीएल कार्ड से संबंधित कोई भी आवेदन लंबित नहीं है। हर महीने पात्र परिवारों के लिए नए राशनकार्ड अपने आप बन रहे हैं। यदि किसी परिवार की आय निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है या पात्रता समाप्त हो जाती है, तो कार्ड स्वत: निरस्त भी हो जाता है। इससे सूची लगातार अपडेट रहती है और अपात्र लोगों को लाभ मिलने की संभावना खत्म हो जाती है।
पहले जहां राशनकार्ड बनवाने में 15 से 20 दिन या उससे अधिक समय लग जाता था, वहीं अब फैमिली आईडी डेटा अपडेट होते ही उसी दिन कार्ड जनरेट हो जाता है। इस डिजिटल सिस्टम ने भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगाने का काम किया है। सरकार का दावा है कि इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सबसे बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें न तो एजेंटों पर निर्भर रहना पड़ता है और न ही विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यह कदम राज्य में पारदर्शी और डेटा-आधारित कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र लाभार्थियों तक समय पर और बिना बाधा के सरकारी सुविधाएं पहुंचें। बजट सत्र के दौरान इस घोषणा को सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
हरियाणा सरकार की यह नई व्यवस्था डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में अन्य सामाजिक योजनाओं को भी इसी मॉडल पर लागू करने की संभावना जताई जा रही है।











