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Education Minister Resignation: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने सिर्फ केंद्र की राजनीति ही नहीं, बल्कि कई राज्यों की सरकारों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पंजाब, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विपक्ष अब शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है. आइए जानते हैं कि किस राज्य में क्या विवाद है और किन कारणों से शिक्षा मंत्रियों के खिलाफ इस्तीफे की मांग तेज हो गई है…
Dharmendra Pradhan Resignation, punjab education minister: एक्ट्रेस श्वेता तिवारी ने भी की पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग.
Education Minister Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सियासी बहस केवल केंद्र तक सीमित नहीं रह गई है.विपक्षी दल, छात्र संगठन और कई सामाजिक संगठन अब अलग-अलग राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं.सबसे ज्यादा चर्चा पंजाब, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की हो रही है, जहां शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है हालांकि इन राज्यों में अभी तक किसी भी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया है.फिलहाल यह मांग विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से उठाई जा रही है.
किन राज्यों में उठ रही है इस्तीफे की मांग?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद फिलहाल तीन राज्यों के शिक्षा मंत्री सबसे ज्यादा राजनीतिक दबाव में बताए जा रहे हैं.पंजाब शिक्षा मंत्री के हरजोत सिंह बैंस,ओडिशा के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड और छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को लेकर काफी चर्चा है.इन तीनों राज्यों में विवाद अलग-अलग हैं, लेकिन विपक्ष का तर्क एक ही है कि जब शिक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक के लिए केंद्र में जवाबदेही तय हो सकती है तो राज्यों में भी मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
ओडिशा: किताबों में 2,000 से ज्यादा गलतियां
सबसे बड़ा विवाद ओडिशा में सामने आया है. राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत सरकारी स्कूलों के लिए 55 नई पाठ्यपुस्तकें तैयार कराईं. बाद में इन किताबों में करीब 2,000 से अधिक तथ्यात्मक, भाषाई और संपादकीय त्रुटियां सामने आईं.इन गलतियों के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया.बीजू जनता दल (BJD) की छात्र इकाई बीजू छात्र जनता दल (BCJD)ने’सेव एजुकेशन अभियान शुरू किया और शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की.संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गलतियां केवल अधिकारियों की नहीं बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करती हैं.उधर ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकार को यह तय करना चाहिए कि छात्रों को त्रुटिरहित किताबें कब तक मिलेंगी हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों के बाद सभी किताबों में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है.सरकार के मुताबिक संशोधित संस्करण तैयार किए जा रहे हैं और नई किताबें जल्द स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी.भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है.
छत्तीसगढ़: छात्र सड़कों पर, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर बढ़ा दबाव
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ में भी विरोध तेज हो गया.राजधानी रायपुर में छात्रों, रिसर्च स्कॉलरों और कांग्रेस की युवा इकाई ने प्रदर्शन करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग की.प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय की जा सकती है तो राज्यों में भी ऐसा होना चाहिए.प्रदर्शन के दौरान रिसर्च स्कॉलर सोनम बंसोड़ ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उनकी मांग पूरी हो चुकी है लेकिन अब उनकी लड़ाई जगदलपुर की NEET अभ्यर्थी हारिका राज नायडू के परिवार को न्याय दिलाने की है.प्रदर्शनकारियों ने इस साल राज्य में हुई कक्षा 12 की हिंदी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक का भी मुद्दा उठाया और इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया.कांग्रेस की युवा इकाई भी इस आंदोलन में शामिल हुई और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से पद छोड़ने की मांग की हालांकि राज्य सरकार की ओर से अब तक इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया गया है.
पंजाब: फार्मेसी परीक्षा में नकल या पेपर लीक? छिड़ी है बहस
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा राजनीतिक बहस पंजाब में देखने को मिल रही है.यहां विपक्ष शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग कर रहा है.विवाद की शुरुआत बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में आयोजित फार्मेसी भर्ती परीक्षा से हुई.परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के ब्लूटूथ डिवाइस, डिजिटल उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नकल करने का मामला सामने आया.पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार भी किया.यहीं से विवाद शुरू हुआ.
विपक्ष का आरोप क्या है?
कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का आरोप है कि यह केवल नकल नहीं बल्कि परीक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता है. विपक्ष का कहना है कि जब केंद्र में परीक्षा अनियमितताओं पर मंत्री से इस्तीफा लिया गया तो पंजाब में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए.पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब हरजोत सिंह बैंस को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए.शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कहा कि राज्य सरकार को पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर जवाब देना होगा.भाजपा नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
सरकार का जवाब क्या है?
पंजाब सरकार इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है.मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा है कि पंजाब में पिछले साढ़े चार वर्षों में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है.उनके मुताबिक फार्मेसी परीक्षा में पेपर लीक नहीं बल्कि नकल (Cheating)का मामला सामने आया था जिसे पुलिस और प्रशासन ने समय रहते पकड़ लिया.मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों ने ब्लूटूथ डिवाइस और डिजिटल उपकरणों के जरिए प्रश्न बाहर भेजने की कोशिश की थी लेकिन यह पेपर लीक नहीं था.उधर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी कहा कि उनके विभाग के तहत आयोजित किसी भी परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ है.उन्होंने कहा कि यदि उनके इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था बेहतर होती है तो वे आज भी इस्तीफा देने को तैयार हैं लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पंजाब को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए.
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में आ गया.अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि अब पंजाब के शिक्षा मंत्री कब इस्तीफा देंगे.वहीं अभिनेता रणवीर शौरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा पहले ही दे देना चाहिए था और यह फैसला हालात बिगड़ने से पहले लिया जाना चाहिए था.
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न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. न्यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्सेस स्टोरी पर काम करते हैं. करीब 16 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय है. दै…
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