भोलेभाबा हमारी फीस भर दो! स्कूल की फीस के लिए नहीं थे पैसे, कांवड़ लेकर निकली 3 बेटियां, महादेव से मदद की आस

On: August 7, 2026 2:48 AM
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15 साल की साधना ने गरीबी, कर्ज और स्कूल फीस की चिंता के बीच हिम्मत नहीं हारी. दिव्यांग माता-पिता के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गांव कोसीकलां तक पैदल निकली है. उसका विश्वास है कि भोले बाबा उसकी पढ़ाई और परिवार की परेशानियां दूर करेंगे. आस्था, संघर्ष और उम्मीद की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करती है.

फरीदाबाद: कई बार जिंदगी ऐसी परीक्षा लेती है, जहां इंसान के पास उम्मीद के अलावा कुछ नहीं बचता. लेकिन कहते हैं कि अगर भगवान पर सच्ची आस्था हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. ऐसी ही एक मिसाल 15 साल की साधना ने पेश की है. गरीब परिवार, विकलांग मां-बाप, सिर पर कर्ज और स्कूल की फीस की चिंता के बीच इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी. उसने भोले बाबा पर भरोसा किया और हरिद्वार से कांवड़ उठाकर अपने गांव कोसीकलां तक पैदल निकल पड़ी. उसके साथ उसकी छोटी बहन, छोटा भाई और पिता भी हैं. इस परिवार का विश्वास है कि भोले बाबा उनकी पुकार जरूर सुनेंगे.

गरीबी से जूझती बेटी की भोले बाबा से प्रार्थना

Local18 से बातचीत में साधना बताती हैं मैं 15 साल की हूं और 11वीं कक्षा में पढ़ती हूं. मैं 27 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकली थी. मैंने भोले बाबा से यही प्रार्थना की है कि मेरे पापा बहुत गरीब हैं और हमारी मदद करें. हमारे ऊपर कर्ज है और मेरी स्कूल की फीस भी जमा नहीं हो पा रही है. मैं चाहती हूं कि भोले बाबा हमारी सारी परेशानियां दूर करें ताकि मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूं. मेरे साथ मेरी छोटी बहन और छोटा भाई भी कांवड़ लेकर चल रहे हैं. हम सभी पूरे विश्वास के साथ यात्रा कर रहे हैं.

रास्ते भर मिला लोगों का प्यार

साधना बताती हैं मैं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां की रहने वाली हूं और आज फरीदाबाद पहुंची हूं. मेरे मम्मी-पापा दोनों दिव्यांग हैं. पापा सिलाई का काम करते हैं और मम्मी गृहिणी हैं. हम चार भाई-बहन हैं जिनमें मैं सबसे बड़ी हूं. यह मेरी जिंदगी की पहली कांवड़ यात्रा है और मेरे पापा भी पहली बार कांवड़ लेकर निकले हैं. पूरे रास्ते में हमें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. जगह-जगह श्रद्धालुओं ने हमारी सेवा की और हमें आगे बढ़ने का हौसला दिया.

भोले बाबा पर भरोसा, बेटी को फीस की आस

साधना के पिता भरत सिंह बताते हैं मैं अपनी दो बेटियों और बेटे के साथ कांवड़ लेकर निकला हूं, जबकि एक बेटी घर पर है. मैं सिलाई का काम करता हूं लेकिन इतनी आमदनी नहीं है कि बच्चों की फीस समय पर भर सकूं. घर बनाने के लिए कर्ज लेना पड़ा और अब उसकी किस्तें भी नहीं चुका पा रहा हूं. परिवार का खर्च भी मुश्किल से चल रहा है. ऐसे में मेरी बेटी ने भोले बाबा पर भरोसा किया और कांवड़ यात्रा पर निकलने का फैसला लिया. मुझे विश्वास है कि भगवान हमारी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे.

भोले बाबा पर भरोसा, बेटी के सपनों की उम्मीद

भरत सिंह बताते हैं हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है, लेकिन भगवान पर भरोसा कभी नहीं टूटा. मेरी बेटी पढ़-लिखकर आगे बढ़ना चाहती है और यही उसकी सबसे बड़ी इच्छा है. हम चाहते हैं कि उसकी पढ़ाई किसी भी हालत में न रुके. हमें भरोसा है कि भोले बाबा हमारी प्रार्थना जरूर सुनेंगे और हमारी बेटी के सपनों को पूरा करने का रास्ता जरूर खोलेंगे. इस परिवार की आस्था और संघर्ष आज हर उस इंसान के लिए प्रेरणा बन गया है जो मुश्किल समय में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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