Haryana News: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू होते ही भिवानी में हादसे की खबर सामने आई है। गांव सुरपुरा कलां के खेतों में करंट लगने से करीब 50 वर्षीय किसान बलवान की मौत हो गई। वहीं, पुलिस मामले की जांच कर रही है। दूसरी ओर, हड़ताल के चलते भिवानी में बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और कार्यालय के बाहर ताला जड़ दिया। निजीकरण, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटर के विरोध में कर्मचारियों ने मोर्चा खोल रखा है। कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल में 99 से 100 प्रतिशत तक कर्मचारियों की भागीदारी का दावा किया है। उनके मुताबिक, भिवानी और चरखी दादरी क्षेत्र में 38 पावर हाउस बंद हैं। बिजली आपूर्ति बहाल करवाने के लिए एसडीएम महेश कुमार और डीएसपी महेश कुमार भी बिजली बोर्ड कार्यालय पहुंचे और नागरिक अस्पताल की बिजली शुरू करवाई।
बिजली कर्मचारियों के सांझा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर हरियाणा में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की जा रही है। भिवानी में कर्मचारियों ने बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की और कार्यालय के बाहर ताला लगा दिया। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि प्रदेशभर में 99 से 100 प्रतिशत कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हैं।
सर्कल सचिव मनोज बल्लू के अनुसार, भिवानी और चरखी दादरी क्षेत्र में 38 पावर हाउस बंद होने की सूचना है। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के बीच नागरिक अस्पताल की बिजली बहाल करवाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम महेश कुमार और डीएसपी महेश कुमार ने बिजली बोर्ड कार्यालय पहुंचकर नागरिक अस्पताल की बिजली शुरू करवाई।
मनोज बल्लू ने कहा कि कर्मचारी निजीकरण के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में जाने से भविष्य में बिजली महंगी होने और युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने आम जनता से आंदोलन में सहयोग करने की अपील की।
बिजली कर्मचारी संगठनों की मुख्य आपत्तियां निजीकरण, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटर योजना को लेकर हैं। एचपीसी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव अशोक गोयत ने कहा कि कर्मचारियों ने पहले भी सरकार के सामने अपनी मांगें रखी थीं, लेकिन उनके अनुसार, अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है।
वहीं, एससी-बीसी यूनियन के सर्कल सचिव कपूर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। अशोक गोयत ने आम जनता से अपील की कि बिजली की लाइन या ट्रांसफार्मर में खराबी आने पर खुद मरम्मत करने के लिए न चढ़ें। उन्होंने कहा कि बिजली का काम जोखिम भरा होता है और इसे प्रशिक्षित कर्मचारियों से ही करवाना चाहिए।
हड़ताल के पहले दिन भिवानी के गांव सुरपुरा कलां के खेतों में करंट लगने से गांव कासनी खुर्द निवासी करीब 50 वर्षीय किसान बलवान की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसान ट्रांसफार्मर पर फेज बदलने के लिए चढ़ा था। इसी दौरान उसे करंट लग गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हादसे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन ही किसान की मौत और नागरिक अस्पताल की बिजली बहाल करवाने के लिए प्रशासन के हस्तक्षेप से बिजली आपूर्ति का मुद्दा चर्चा में आ गया है। कर्मचारी संगठन निजीकरण, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटर के विरोध में अपनी मांगों पर अड़े हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।










