बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन की अफवाहों ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक शोक संदेश पोस्ट किया और बाद में उसे डिलीट कर दिया। हालांकि, इस भ्रम को जल्द ही स्वयं धर्मेंद्र के परिवार ने तोड़ दिया।
धर्मेंद्र की बेटी ईशा देओल ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी अटकलों और अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया धर्मेंद्र की हालत स्थिर है। वह रिकवर कर रहे हैं। मीडिया द्वारा फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से गलत हैं।
धर्मेंद्र के स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति
89 वर्षीय अभिनेता को सोमवार, 10 नवंबर को सांस लेने में तकलीफ के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर सहयोग पर रखा गया है, लेकिन चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है।
परिवार की अपील
ईशा देओल ने अपने बयान में सभी से दो महत्वपूर्ण अनुरोध किए। परिवार की निजता (प्राइवेसी) का सम्मान करें। धर्मेंद्र के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते रहें।
राजनाथ सिंह के ट्वीट पर उठे सवाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शोक संदेश पोस्ट करने और उसे बाद में हटा देने की घटना ने इस अफवाह को और हवा दी। हालांकि, परिवार के त्वरित खंडन ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।
बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र
धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल (जन्म: 8 दिसंबर 1935) बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और दीर्घकालीन अभिनेता हैं जिन्होंने 60 साल से अधिक का शानदार सिनेमाई सफर तय किया है। उन्हें बॉलीवुड का “हीमैन” (He-Man) कहा जाता है क्योंकि उनके शारीरिक सौंदर्य, काया, और करिश्माई व्यक्तित्व ने पूरी दुनिया को मुग्ध किया। 1970 के दशक की शुरुआत में वह विश्व के सबसे सुंदर पुरुषों में गिने जाते थे। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, एक दशक में 8 लगातार हिट फिल्में देने का रिकॉर्डबनाया, और भारतीय सिनेमा को शोले, धर्मवीर, चुपके चुपके जैसी अमर कृतियां दीं।
बचपन और शुरुआती जीवन: पंजाब से बॉलीवुड तक
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में हुआ था। वे एक पारंपरिक पंजाबी जाट सिख परिवार में पैदा हुए थे। उनके पिता केवल कृष्ण सिंह देओल लुधियाना में सरकारी स्कूल के हेडमास्टर थे और उनकी माता सतवंत कौर एक गृहिणी थीं। उनका पैतृक गांव लुधियाना के पाखोवाल तहसील में राइकोट के पास “डांगोन” है।
शिक्षा और प्रारंभिक वर्ष
धर्मेंद्र ने अपने बचपन का अधिकांश समय साहनेवाल गांव में बिताया जहां उनके पिता स्कूल में शिक्षक थे। उन्होंने लालटोन कलां, लुधियाना में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा ली। 1952 में उन्होंने फागवड़ा के रामगढ़िया कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। स्कूल और कॉलेज के दिनों में उनमें साहित्य और अभिनय के प्रति गहरी रुचि थी जो उन्हें अभिनेता बनने की प्रेरणा देती रही।
बॉलीवुड की ओर प्रस्थान
1952 में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, धर्मेंद्र पहली बार मुंबई आने का सपना देखते थे। एक दिन उन्होंने प्रसिद्ध फिल्ममेकर बिमल रॉय और गुरु द्वारा नए प्रतिभाशाली अभिनेताओं की खोज के लिए दिए गए विज्ञापन को देखा। इसी से उत्साहित होकर वे मलयट्टूर गए और जान मोहम्मद से अपनी फोटोग्राफी करवाई। वह फिल्मफेयर मैगजीन की न्यू टैलेंट अवार्ड में जीत गए जिससे उन्हें मुंबई में अभिनय के रास्ते खुल गए।
व्यक्तिगत जीवन: दो शादियां और बड़ा परिवार
पहली शादी और पहला परिवार (प्रकाश कौर)
धर्मेंद्र ने मात्र 19 साल की उम्र में, 1954 में प्रकाश कौर से शादी की – यह बिल्कुल उनकी फिल्म डेब्यू से पहले की बात थी। प्रकाश कौर एक होममेकर रहीं और उन्होंने आजीवन धर्मेंद्र के साथ रहीं, भले ही उनकी दूसरी शादी हुई। इस पहली शादी से उन्हें चार संतानें हुईं:
सनी देओल (अजय सिंह देओल) – जन्म 1957: बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध एक्शन हीरो, उनकी पहली फिल्म “बेताब” (1983) बेहद सफल रही
बॉबी देओल (विजय सिंह देओल) – जन्म 1969: फिल्मफेयर अवार्ड विजेता, “बारिश” (1995) से डेब्यू, अब ओटीटी में सफल
विजेता देओल – बेटी, कैलिफोर्निया में रहती हैं
अजीता देओल – छोटी बेटी, कैलिफोर्निया प्रवासी
प्रकाश कौर ने कभी भी धर्मेंद्र की दूसरी शादी के विरुद्ध कोई शिकायत नहीं की। 1981 में स्टारडस्ट मैगजीन के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा: “मेरे पति को ही क्यों? कोई भी आदमी मेरी जगह हेमा को चुनता” और आगे कहा “मेरे पति सबसे अच्छे पति नहीं हैं, लेकिन वह सबसे अच्छे पिता हैं। उनके बच्चे उन्हें पसंद करते हैं और वह उन्हें कभी नहीं भूलते”।
दूसरी शादी और दूसरा परिवार (हेमा मालिनी)
1970 में शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की मुलाकात हुई। शोले (1975) की फिल्मिंग के दौरान उनके बीच प्रेम संबंध विकसित हुए जो शादी तक पहुंच गए। धर्मेंद्र ने पहली शादी बनाए रखते हुए 1980 में हेमा मालिनी से शादी कर ली। इस दूसरी शादी को धार्मिक रूप से वैध बनाने के लिए कहा जाता है कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया, हालांकि 2004 में उन्होंने कहा कि वे आर्य समाजी हिंदू रहे हैं।
इस दूसरी शादी से उन्हें दो बेटियां हुईं:
ईशा देओल – जन्म 1981: सफल अभिनेत्री, नर्तकी और निर्माता, मॉडल बनने से लेकर अभिनय तक का सफर
अहाना देओल – जन्म 1985: नर्तकी और असिस्टेंट डायरेक्टर, सांस्कृतिक क्षेत्र में काम
ईशा देओल ने एक बार बताया कि उन्हें अपने पिता की पहली शादी के बारे में 4वीं कक्षा में एक सहपाठी ने पूछने पर पता चला। उस समय हेमा मालिनी ने उन्हें सच्चाई बताई। ईशा ने कहा कि इससे वह कभी दुःखी नहीं हुईं और उन्हें गर्व है कि उनके माता-पिता ने उन्हें कभी इस स्थिति को लेकर बुरा महसूस नहीं कराया।
बड़ा परिवार: 13 नाती-पोते
धर्मेंद्र का परिवार अब 6 बच्चों और 13+ पोते-पोतियों का एक विस्तृत परिवार बन गया है:
सनी देओल के बेटे: करण देओल (2000 में जन्म, अभिनेता – “पल पल दिल के पास” से डेब्यू) और राजवीर देओल
बॉबी देओल के बेटे: धर्मेंद्र (नाती को दादा के नाम पर रखा गया)
विजेता के बच्चे: एक बेटा और एक बेटी
अजीता के बेटियां: दो बेटियां
ईशा के बेटियां: दो बेटियां
अहाना के बेटे-बेटियां: एक बेटा और दो जुड़वां बेटियां
फिल्मी करियर: 60 साल की अद्भुत यात्रा
डेब्यू और प्रारंभिक दिन (1960-1965)
15 जनवरी 1960 को धर्मेंद्र ने फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से अपनी डेब्यू की, जिसमें वे बलराज साहनी के साथ अभिनय करते थे। शर्मनाक रूप से उन्हें इस फिल्म के लिए केवल 51 रुपये का भुगतान मिला। 1961 में “शोला और शबनम” से उन्हें पहला हिट मिला। 1960 के दशक में उन्होंने 25 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 12 हिट रहीं। इस समय की उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल हैं: “अनपढ़” (1962), “बंदिनी” (1963), “हकीकत” (1964), और “आयी मिलन की बेला” (1964) जो ब्लॉकबस्टर थीं।
रोमांटिक हीरो का उदय (1964-1970)
1964 में “आयी मिलन की बेला” में धर्मेंद्र का शक्तिशाली प्रदर्शन एक ब्रेकथ्रू साबित हुआ। इसके बाद 1964-1970 के बीच वह रोमांटिक हीरो के रूप में हीरो की भूमिकाओं में नियमित रूप से दिखाई दिए। इस अवधि में उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में शामिल हैं: “शिकार” (1968), “आंखें” (1968), “आया सावन झूम के” (1969) और “सत्यकाम” (1969)।
“सत्यकाम” में धर्मेंद्र का प्रदर्शन उनके करियर का एक महीन और शक्तिशाली नमूना था। निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में वह एक आदर्शवादी इंजीनियर की भूमिका निभाते हैं जो सत्य के लिए सबकुछ त्याग देता है। यह फिल्म राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीती और आलोचकों द्वारा भारतीय सिनेमा के सबसे महीन प्रदर्शनों में से एक माना गया।
एक्शन हीरो में संक्रमण (1966)
1966 में “फूल और पत्थर” फिल्म ने धर्मेंद्र के करियर को पूरी तरह बदल दिया। इस फिल्म में उन्होंने पहली बार एक्शन हीरो की मुख्य भूमिका निभाई और यह बॉक्स ऑफिस पर 2.75-2.85 करोड़ रुपये का ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म की सफलता के बाद भारतीय सिनेमा में रोमांटिक फिल्मों से एक्शन फिल्मों की ओर एक व्यापक बदलाव आ गया। धर्मेंद्र ने एक्शन और रोमांस का एक नया सूत्र खोजा जो बॉक्स ऑफिस में जबरदस्त सफलता दिला।

सुपरस्टारडम का दौर (1970-1980)
1970 के दशक धर्मेंद्र के लिए स्वर्ण दशक साबित हुआ। इस दशक में उन्होंने 36 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 28 हिट रहीं। 1970 में ही उन्हें 4 मुख्य सफलताएं मिलीं: “जीवन मृत्यु”, “तुम हसीन मैं जवान”, “शरारत” और “कब क्यों और कहां”।
1971 में “मेरा गांव मेरा देश” में उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड के लिए दूसरी बार नामांकन मिला। 1972 में “सीता और गीता” और “राजा जानी” जैसी सुपरहिट फिल्मों के कारण वह फिल्म इंडस्ट्री के नंबर वन अभिनेता बन गए।
1973 का साल धर्मेंद्र के करियर में सबसे शानदार साल साबित हुआ जब उन्होंने 8 लगातार हिट फिल्में दीं – यह रिकॉर्ड आज तक किसी अन्य अभिनेता ने नहीं तोड़ा है। इस साल की फिल्मों में शामिल हैं: “यादों की बारात”, “जुगनु”, “कीमत”, “लोफर”, “कहानी किस्मत की” और अन्य।
1975 में राजकमल सिप्पी द्वारा निर्देशित “शोले” रिलीज हुई जो भारतीय सिनेमा का एक अमर क्लासिक बन गई। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया और “वीरु” का किरदार एक किंवदंती बन गया। शोले ने 15 करोड़ रुपये की कमाई की, जो आज के हिसाब से 3000 करोड़ से अधिक है। यह फिल्म दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाली भारतीय फिल्मों में से एक थी।
1976 में “धर्मवीर” में भी धर्मेंद्र का प्रदर्शन शानदार था और यह 6.75 करोड़ रुपये का ब्लॉकबस्टर था।
1980 के दशक का शिखर और राजनीति में प्रवेश (1980-1992)
1980 के दशक में भी धर्मेंद्र अपनी एक्शन-हीरो इमेज को बनाए रखने में सफल रहे। इस दशक में उन्होंने 42 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 25 हिट रहीं। 1987 एक अन्य विशेष साल साबित हुआ जब उन्होंने 7 हिट फिल्में दीं, जिसमें “हुकूमत” (5.50 करोड़ का सुपरहिट) शामिल थी। 1988 में “आग ही आग” 4.5 करोड़ का हिट रहा।
लेकिन 1980 के दशक में धर्मेंद्र के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया जब उन्होंने 2004-2009 तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से बीकानेर, राजस्थान का संसद सदस्य (लोकसभा) रहे। उन्होंने बाद में कहा: “मुझे भावनात्मक रूप से दबाव दिया गया। मेरा अटल बिहारी वाजपेयी जी को बहुत सम्मान है, वह एक महान इंसान हैं, एक महान नेता हैं”।
1992 में “तहलका” धर्मेंद्र की एक लीड एक्टर के रूप में अंतिम हिट फिल्म साबित हुई।
करियर में गिरावट और पुनः स्थापना (1992-2007)
1990 के दशक के दौरान धर्मेंद्र की लीड एक्टर के रूप में सफलता में गिरावट आने लगी। इस दशक में उन्होंने 35 फिल्मों में काम किया, लेकिन केवल 8 हिट रहीं, जबकि 18 फ्लॉप रहीं। 1993 की फिल्म “क्षत्रिय” को छोड़कर अधिकांश फिल्में असफल रहीं।
हालांकि, 2000 के दशक में धर्मेंद्र ने एक अद्भुत पुनः स्थापना की। वे धीरे-धीरे मुख्य भूमिकाओं से चरित्र भूमिकाओं की ओर आएऔर यह कदम उनके लिए बेहद सफल साबित हुआ। 2007 में “लाइफ इन ए मेट्रो” (राहुल बोस के साथ) और “अपने” (अपने दोनों बेटों सनी और बॉबी के साथ) को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
पुनः स्थापना और बुजुर्ग भूमिकाएं (2007-2024)
2011 में धर्मेंद्र की फिल्म “यमला पगला दीवाना” अपने दोनों बेटों सनी और बॉबी के साथ एक बड़ी सफलता साबित हुई – यह पहली बार था कि धर्मेंद्र और उनके दोनों बेटे एक साथ फिल्म में काम कर रहे थे। यह फिल्म 55.28 करोड़ का सेमी-हिट रहा।
2023 में करण जौहर द्वारा निर्देशित “रॉकी और रानी की प्रेम कहानी” में धर्मेंद्र ने एक वरिष्ठ भूमिका निभाई। 88 साल की उम्र में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा और दर्शकों को उनकी उपस्थिति अच्छी लगी।
2024 में “तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया” में भी वे दिखाई दिए।
सबसे प्रसिद्ध सह-कलाकार और जोड़ियां
आशा पारेख के साथ – सबसे सफल रोमांटिक जोड़ी
धर्मेंद्र और आशा पारेख की जोड़ी 1960 के दशक और 1970 के दशक की सबसे सफल रोमांटिक जोड़ी साबित हुई। उन्होंने एक-दूसरे के साथ 5 फिल्मों में काम किया, जिनमें से सभी हिट या सुपरहिट रहीं।
उनकी सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में शामिल हैं: “शिकार” (1968), “आया सावन झूम के” (1969), “आये दिन बहार के”, “समाधि” और “मेरा गांव मेरा देश”। इन सभी फिल्मों में उनकी रसायनिकी और प्रदर्शन दर्शकों के दिलों को जीत लेता था।
हेमा मालिनी के साथ – सबसे प्रचुर सहयोग
हेमा मालिनी धर्मेंद्र की सबसे अधिक फिल्मों की साथी साबित हुईं। उन्होंने एक-दूसरे के साथ 35 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 20 हिट और 15 फ्लॉप रहीं।
उनकी सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में शामिल हैं: “शोले”, “चरस”, “प्रतिज्ञा”, “खेल खेल में”, “दोस्त”, “दिल्लगी” और “द बर्निंग ट्रेन”। यह जोड़ी 1970 के दशक में दर्शकों का पसंदीदा रहा, भले ही बाद में उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगीं।
अन्य प्रमुख सहयोगियों
शर्मिला टैगोर के साथ: “सत्यकाम”, “अनुपमा”, “चुपके चुपके” – ये सभी आलोचकों द्वारा प्रशंसित और कलात्मक रूप से महत्वपूर्ण फिल्में थीं।
मीना कुमारी के साथ: “बंदिनी”, “मझली दीदी”, “गंगा की लहरें” – भावनात्मक नाटक।
अमिताभ बच्चन के साथ: “शोले” – यह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध द्विकों फिल्मों में से एक है।
सबसे प्रसिद्ध और आइकॉनिक फिल्में
शोले (1975) – अमर क्लासिक
“शोले” को भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ एक्शन फिल्मों में से एक माना जाता है। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने “वीरु” की भूमिका निभाई, जो एक किंवदंती बन गई। शोले ने 2005 में फिल्मफेयर अवार्ड के “50 वर्षों की सर्वश्रेष्ठ फिल्म” का खिताब जीता। इस फिल्म के संवाद आज भी लोगों के बीच बोले जाते हैं, जैसे “यह बंदूक का दाग होगा” और “जय-वीरु की जोड़ी”।
मेरा गांव मेरा देश (1971)
यह फिल्म धर्मेंद्र के एक्शन हीरो इमेज को सबसे मजबूत करने वाली फिल्म थी। इसमें उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड के लिए दूसरी बार नामांकन मिला। यह फिल्म 3 करोड़ का सुपरहिट साबित हुई और धर्मेंद्र को विश्वव्यापी प्रसिद्धि दिलाई।
धर्मवीर (1976)
यह एक्शन फिल्म 6.75 करोड़ रुपये का ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसमें धर्मेंद्र के एक्शन और इमोशनल दोनों प्रदर्शन दर्शकों को मुग्ध कर गए। इसी फिल्म से उन्होंने अपने बड़े बेटे सनी देओल को भी लांच किया।
सीता और गीता (1972)
यह एक कॉमेडी-एक्शन फिल्म थी जो 3.25 करोड़ का सुपरहिट रहा। धर्मेंद्र ने यह साबित कर दिया कि वे एक्शन के अलावा कॉमेडी में भी माहिर हैं।
हुकूमत (1987)
1987 में धर्मेंद्र का यह एक्शन थ्रिलर 5.50 करोड़ रुपये का सुपरहिट साबित हुआ, जो उस साल की सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्म थी। यह उनकी लेट कैरियर में सबसे बड़ी सफलताओं में से एक था।
पुरस्कार, सम्मान और स्वीकृति
फिल्मफेयर पुरस्कार और नामांकन
धर्मेंद्र को अपने 60+ साल के करियर में लगभग 9 फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकन मिले, विशेष रूप से 1960 के दशक और 1970 के दशक में जब वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में नियमित रूप से नामांकित होते थे।
फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (1997)
1997 में धर्मेंद्र को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में उनके 37 साल के योगदान और अमूल्य सेवाओं के लिए दिया गया था।
पद्म भूषण (2012)
भारत सरकार ने 2012 में धर्मेंद्र को “पद्म भूषण” से सम्मानित किया, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उनके मनोरंजन उद्योग में असाधारण योगदान के लिए दिया गया था।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
धर्मेंद्र द्वारा अभिनीत या निर्मित कई फिल्मों ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं, जिनमें शामिल हैं: “सत्यकाम” (1969 – सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म), “घायल” (1990 – निर्माता के रूप में), “द बर्निंग ट्रेन” (1980)।
अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति
1970 के दशक की शुरुआत में धर्मेंद्र को विश्व के सबसे सुंदर पुरुषों की सूची में स्थान मिला। 2022 में Outlook India ने उन्हें “75 सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड अभिनेता” में शामिल किया। Rediff.com ने उन्हें “सभी समय के शीर्ष 10 बॉलीवुड अभिनेताओं” की सूची में 10वां स्थान दिया।
व्यावसायिक साहस: निर्माता और उद्यमी
विजयता फिल्म्स (1983)
1983 में धर्मेंद्र ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी “विजयता फिल्म्स” की स्थापना की, जिसका नाम उनकी बड़ी बेटी विजेता के नाम पर रखा गया।
1983 में उनकी पहली फिल्म “बेताब” थी, जिसमें उन्होंने अपने बड़े बेटे सनी देओल को लॉन्च किया। यह फिल्म उस साल की दूसरी सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्म बन गई।
1990 में उन्होंने “घायल” का निर्माण किया, जिसमें सनी देओल अभिनीत थे। यह फिल्म बेहद सफल साबित हुई और इसे 7 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले, साथ ही “संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म” का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता।
1995 में उन्होंने “बारिश” का निर्माण किया, जिसमें उनके छोटे बेटे बॉबी देओल को लॉन्च किया। यह फिल्म भी एक बड़ी सफलता साबित हुई।
रेस्तरां और होटल व्यवसाय
2022 में धर्मेंद्र ने खाद्य और आतिथ्य व्यवसाय में प्रवेश किया। उन्होंने “गरम धर्मा ढाबा” नामक एक रेस्तरां खोला।
बाद में उन्होंने “हीमैन” नामक एक रेस्तरां करनाल हाईवे पर खोला।
लोनावाला में उनके फार्महाउस के पास एक 30-बेडरूम रिसॉर्ट विकसित करने की योजना भी है, जिसमें एक रेस्तरां चेन के साथ साझेदारी है।
संपत्ति और वित्तीय साम्राज्य
कुल नेट वर्थ: 335 करोड़ रुपये
धर्मेंद्र का कुल नेट वर्थ लगभग 335 करोड़ रुपये (लगभग 70 मिलियन डॉलर USD) आंका जाता है। यह संपत्ति 60+ वर्षों के फिल्मी करियर, प्रोडक्शन हाउस, व्यावसायिक निवेश और रियल एस्टेट से आई है।
रियल एस्टेट संपत्ति: 17+ करोड़ रुपये
धर्मेंद्र महाराष्ट्र में 17 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति के मालिक हैं, जिनमें शामिल हैं:
मुंबई (जुहु) में आवासीय संपत्तियां
लोनावाला में 12 एकड़ का प्रसिद्ध फार्महाउस – यह उनकी प्रिय जगह है जहां वह अक्सर रहते हैं
विभिन्न स्थानों पर निवेश संपत्ति
कृषि और अन्य भूमि: 140 लाख रुपये
महाराष्ट्र में कृषि योग्य भूमि में 88 लाख रुपये का निवेश और गैर-कृषि भूमि में 52 लाख रुपये का निवेश।
वार्षिक आय और फिल्म शुल्क
वार्षिक आय: 12 करोड़ रुपये या उससे अधिक
प्रति फिल्म शुल्क: लगभग 5 करोड़ रुपये (चरित्र भूमिकाओं के लिए)
मासिक आय: लगभग 1 करोड़ रुपये
व्यावसायिक और अन्य संपत्तियां
विजयता फिल्म्स निर्माण कंपनी और उसके कानूनी अधिकार
गरम धर्मा ढाबा रेस्तरां में निवेश
हीमैन रेस्तरां में साझेदारी
स्टॉक, प्रतिभूतियां और अन्य वित्तीय निवेश
विविध संपत्तियां (वाहन, मूल्यवान वस्तुएं): 13.20 करोड़ रुपये
फिल्मी निर्देशकों के साथ महत्वपूर्ण सहयोग
हृषिकेश मुखर्जी के साथ – कलात्मक संवाद
हृषिकेश मुखर्जी बॉलीवुड के महान निर्देशकों में से एक थे। धर्मेंद्र ने उनके साथ 4 फिल्मों में काम किया: “सत्यकाम”, “अनुपमा”, “चुपके चुपके”, “नया ज़माना”।
इन सभी फिल्मों में धर्मेंद्र के प्रदर्शन को आलोचकों द्वारा अत्यंत प्रशंसित किया गया। विशेषकर, “सत्यकाम” में उनके प्रदर्शन को उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जाता है।
रामेश सिप्पी के साथ – एक्शन क्लासिक्स
रामेश सिप्पी के निर्देशन में धर्मेंद्र ने तीन महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया: “शोले” (1975), “शान” (1980), और “तहलका” (1992)। “शोले” भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली एक्शन फिल्मों में से एक है।
राज खोसला के साथ
राज खोसला ने धर्मेंद्र को “मेरा गांव मेरा देश” (1971) में निर्देशित किया, जहां उन्होंने एक्शन हीरो के रूप में अपनी छवि को मजबूत किया और फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकन मिला।
अन्य प्रमुख निर्देशक
यश चोपड़ा, राजकुमार संतोषी, शक्ति समंता, और अन्य दिग्गज निर्देशकों ने भी धर्मेंद्र के साथ काम किया है। हेमा मालिनी ने एक निर्देशक के रूप में उनके साथ 2011 में “टेल मी ओ कखुदा” में काम किया, जो एक पारिवारिक परियोजना थी।
संपूर्ण जीवन यात्रा: 1935 से 2025 तक
बहुआयामी अभिनेता: शैलियों में बहुमुखी प्रतिभा
रोमांटिक नायक (1960s-1970s)
धर्मेंद्र की रोमांटिक फिल्मों में प्राकृतिक आकर्षण, आकर्षक व्यक्तित्व और भावनात्मक गहराई दिखाई देती थी। “आयी मिलन की बेला” और “आया सावन झूम के” जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी रोमांटिक अपील का पूरा उपयोग किया।
एक्शन हीरो (1966-1992)
“फूल और पत्थर” से लेकर “तहलका” तक, धर्मेंद्र एक्शन हीरो के रूप में अपनी शारीरिक क्षमता, अभिनय कौशल और करिश्माई मौजूदगी का प्रदर्शन करते रहे। उनकी एक्शन अभिनय प्राकृतिक, सहज और दर्शकों को आकर्षित करने वाली थी।
कॉमेडी अभिनेता
“सीता और गीता” और “चुपके चुपके” जैसी फिल्मों में धर्मेंद्र ने साबित किया कि वे कॉमेडी में भी माहिर हैं, भले ही उनकी अधिकांश प्रसिद्धि एक्शन फिल्मों से आई है।
सामाजिक नाटक और आलोचकों की पसंदीदा
“सत्यकाम”, “अनुपमा” और “बंदिनी” जैसी फिल्मों में धर्मेंद्र ने आलोचकों का सबसे अधिक प्रशंसा अर्जित की। इन फिल्मों में उनके प्रदर्शन सूक्ष्म, आंतरिक और कलात्मक रूप से समृद्ध थे।
पारिवारिक नाटक और चरित्र भूमिकाएं (2000s-2020s)
अपने बाद के दिनों में, धर्मेंद्र को बुजुर्ग पिता, दादा, और विवेकशील परामर्शदाता की भूमिकाओं में देखा गया। “अपने”, “यमला पगला दीवाना” श्रृंखला और “रॉकी अौर रानी की प्रेम कहानी” में उनकी उपस्थिति फिल्मों को भावनात्मक गहराई देती है।
पारिवारिक विरासत और सिनेमाई विरासत
परिवार में सिनेमा
धर्मेंद्र का पूरा परिवार ही सिनेमा से जुड़ा है। उनके दोनों बेटे सनी और बॉबी सफल अभिनेता हैं, उनकी बेटी ईशा एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं, और उनकी पत्नी हेमा मालिनी एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और पूर्व MP हैं।
उनके पोते करण और राजवीर भी अभिनेताओं के रूप में उभरते हुए सितारे हैं। यह देओल परिवार भारतीय सिनेमा का सबसे प्रभावशाली पारिवारिक साम्राज्य बन गया है।

सिनेमा को प्रभावित करना
धर्मेंद्र के 60+ साल के करियर ने भारतीय सिनेमा को गहरे तरीके से प्रभावित किया है। उन्होंने एक्शन फिल्मों को लोकप्रिय बनाया, रोमांटिक नायक की एक नई परिभाषा दी, और बाद में चरित्र अभिनय में एक नया माध्यम तैयार किया।
धर्मेंद्र बॉलीवुड के एक सच्चे किंवदंती हैं। पंजाब के एक छोटे से गांव से शुरू करके, उन्होंने बॉलीवुड के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचे। उनके 60+ साल के करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, कई पुरस्कार जीते, और भारतीय सिनेमा को हमेशा के लिए बदल दिया।
“शोले” के “वीरु”, “धर्मवीर” के धर्मेंद्र, “हुकूमत” के नायक – ये सभी किरदार भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक अभिन्न अंग बन गए हैं। भले ही अब वह 89 साल के हो गए हों, वह अपनी प्रतिभा से अभिनय करते रहे हैं।
धर्मेंद्र न केवल एक अभिनेता हैं, बल्कि एक सिनेमाई संस्थान हैं – एक ऐसे अभिनेता जिन्होंने साबित कर दिया है कि प्रतिभा, मेहनत, और समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता, किसी भी व्यक्ति को एक किंवदंती में बदल सकती है।



















