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Plot Registry Tips : क्या आप भी प्लॉट खरीदने जा रहे हैं. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. प्लॉट खरीदते समय सिर्फ एग्रीमेंट टू सेल पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है. बिना रजिस्ट्री जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलता है, इस बात की गांठ बांध लें. अगर विक्रेता रजिस्ट्री से मना कर दे तो क्या करें. लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद के एडवोकेट मोहन तिवारी से बात की. वे बताते हैं कि अगर विक्रेता रजिस्ट्री कराने से मना कर देता है, तो खरीदार कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. इसके लिए एग्रीमेंट और भुगतान से जुड़े दस्तावेज दिखाना जरूरी है.
फरीदाबाद. अपना घर या प्लॉट खरीदना हर किसी का सपना होता है. इसके लिए लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा देते हैं. कई बार लोग जल्दबाजी में सिर्फ एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर प्लॉट खरीद लेते हैं और सोचते हैं कि अब जमीन उनकी हो गई है, लेकिन बाद में जब रजिस्ट्री कराने की बात आती है, तो परेशानी शुरू हो जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ एग्रीमेंट से जमीन का मालिकाना हक मिल जाता है और अगर विक्रेता रजिस्ट्री कराने से मना कर दे, तो खरीदार को क्या करना चाहिए. इन सभी सवालों के बारे में लोकल 18 ने फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी से बात की. मोहन तिवारी बताते हैं कि सामान्य तौर पर सिर्फ एग्रीमेंट टू सेल करने से जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलता है. इसके लिए सेल डीड यानी रजिस्ट्री जरूरी होती है. अगर आपने किसी से प्लॉट खरीदा है, तो दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से रजिस्ट्री की तारीख तय करनी चाहिए. इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफिस में जरूरी प्रक्रिया पूरी करके स्टाम्प ड्यूटी और अन्य निर्धारित शुल्क जमा करना होता है. इसके बाद तय तारीख पर रजिस्ट्री कराई जाती है.
मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर विक्रेता रजिस्ट्री कराने से मना कर देता है, तो खरीदार कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. सबसे पहले विक्रेता को कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है. इसके बाद भी वह रजिस्ट्री कराने के लिए तैयार नहीं होता है, तो खरीदार कोर्ट में दावा कर सकता है. हालांकि, इसके लिए एग्रीमेंट और भुगतान से जुड़े दस्तावेज दिखाना जरूरी होता है. कोर्ट मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर फैसला करता है. अगर दावा सही पाया जाता है, तो कोर्ट विक्रेता को रजिस्ट्री कराने के लिए बाध्य कर सकता है.
सिर्फ कब्जा लेना काफी नहीं
एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति ने एक ही प्लॉट को कई लोगों को बेच दिया है, तो पीड़ित खरीदार पुलिस में शिकायत कर सकता है. ऐसे मामलों में धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, कौन-सी कानूनी धारा लागू होगी, यह मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है. कई लोग एग्रीमेंट करने के बाद प्लॉट पर कब्जा भी ले लेते हैं, लेकिन केवल कब्जा मिलने या एग्रीमेंट होने से मालिकाना हक नहीं मिल जाता है. इसलिए खरीदार को एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से समझना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए.
पहले ही कर लें ये काम
मोहन तिवारी बताते हैं कि प्लॉट खरीदने से पहले विक्रेता के मालिकाना हक, जमीन का क्षेत्रफल, खसरा-खतौनी और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है. दस्तावेजों में दर्ज जमीन के नंबर और मौके पर मौजूद प्लॉट का भी मिलान करना चाहिए. पैसे डूबने से बचने के लिए पहले प्रॉपर्टी की अच्छी तरह जांच कराएं. एग्रीमेंट टू सेल की शर्तें स्पष्ट रखें और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्री जरूर कराएं. केवल एग्रीमेंट या कब्जे के भरोसे पूरी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…










