फरीदाबाद. बारिश के मौसम में बच्चों को बुखार, खांसी, जुकाम और दस्त जैसी दिक्कतें काफी देखने को मिलती हैं. ऐसे में कई घरों में जैसे ही बच्चे को बुखार आता है, बिना डॉक्टर से पूछे एंटीबायोटिक दवा शुरू कर दी जाती है. लोगों को लगता है इससे बच्चा जल्दी ठीक हो जाएगा, लेकिन हर बार ऐसा करना सही नहीं होता. कई बार बुखार वायरस की वजह से होता है और उस स्थिति में एंटीबायोटिक बिल्कुल काम नहीं करती. उल्टा बिना जरूरत दवा देने से बच्चे के शरीर पर गलत असर पड़ सकता है और आगे चलकर दवाएं भी कम असर करने लगती हैं. इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कब एंटीबायोटिक की जरूरत होती है और कब सिर्फ सही देखभाल और डॉक्टर की सलाह ही काफी होती है.
खुद हो जाते हैं सही
लोकल 18 से फरीदाबाद अमृता हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा खन्ना बताती हैं कि इन दिनों बारिश के मौसम में आने वाले करीब 80 फीसदी संक्रमण वायरल होते हैं. वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता. ऐसे मरीज आमतौर पर चार से पांच दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं. इस दौरान बच्चे को सही दवा, आराम, पर्याप्त पानी और बुखार के हिसाब से इलाज की जरूरत होती है. बिना वजह एंटीबायोटिक देना सही तरीका नहीं है.
वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में अंतर
डॉ. पूजा खन्ना बताती हैं कि वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कई लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए केवल बुखार देखकर फैसला नहीं किया जा सकता. अगर बच्चे को खांसी, बलगम, छाती में दर्द और बुखार जैसी परेशानी सिर्फ एक ही हिस्से से जुड़ी है तो बैक्टीरियल संक्रमण की संभावना हो सकती है. अगर खांसी के साथ आंखों से पानी आना, शरीर दर्द, दस्त या एक साथ कई तरह के लक्षण दिख रहे हैं तो यह वायरल संक्रमण की तरफ इशारा करता है.
ऐसे पहचानें वायरल संक्रमण
डॉ. पूजा खन्ना बताती हैं कि वायरल संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है. अक्सर घर में एक बच्चा बीमार होता है तो कुछ दिन बाद दूसरे बच्चे या बड़े भी उसी तरह बीमार हो जाते हैं. बैक्टीरियल संक्रमण आमतौर पर इस तरह एक से दूसरे में नहीं फैलता. अगर बुखार उतरने के बाद बच्चा फिर से खेलने, खाने और सामान्य गतिविधियां करने लगे तो यह वायरल संक्रमण की पहचान हो सकती है, लेकिन अगर बुखार कम होने के बाद भी बच्चा लगातार सुस्त और ज्यादा बीमार दिखाई दे तो डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए.
बुखार का तरीका समझें
डॉ. पूजा बताती हैं कि वायरल संक्रमण में कई बार बुखार अचानक बहुत तेज चढ़ जाता है. बच्चे का तापमान 103 या 104 डिग्री तक पहुंच सकता है. बैक्टीरियल संक्रमण में अक्सर बुखार धीरे-धीरे बढ़ता है. पहले हल्का बुखार रहता है, फिर कुछ समय बाद ज्यादा बढ़ने लगता है. हालांकि सिर्फ इसी आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए. अगर माता-पिता को कोई भी शंका हो तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं. घर में बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक दवा बच्चे को कभी नहीं देनी चाहिए. कई एंटीबायोटिक सिरप पाउडर के रूप में आते हैं जिन्हें पानी मिलाकर बनाया जाता है और उन्हें कुछ ही दिनों के भीतर इस्तेमाल करना होता है. लंबे समय तक रखी हुई दवा खराब भी हो सकती है. इसी तरह पुराने डॉक्टर के पर्चे पर दोबारा दवा देना भी सही नहीं है, क्योंकि हर बार बीमारी की वजह अलग हो सकती है.
मेडिकल स्टोर से क्यों बचें
डॉ. पूजा खन्ना के मुताबिक, बिना डॉक्टर की सलाह मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर बच्चे को देना भी ठीक नहीं है. कई बार वायरल संक्रमण में भी एंटीबायोटिक दे दी जाती है जबकि उसका कोई फायदा नहीं होता. इसलिए केवल केमिस्ट की सलाह पर दवा शुरू करने की बजाय पहले डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. जरूरत होने पर ही एंटीबायोटिक दी जानी चाहिए. अगर डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी है तो उसे तय मात्रा और तय समय पर ही देना चाहिए. अगर बच्चा दवा लेने के बाद उल्टी कर देता है तो दोबारा दवा देने से पहले डॉक्टर से सलाह लें. अगर डॉक्टर ने सात दिन की दवा लिखी है तो बुखार तीन दिन में उतर जाने पर भी दवा बीच में बंद नहीं करनी चाहिए. पूरा कोर्स पूरा करना ही सही इलाज का हिस्सा होता है.











