- किसानों की उपेक्षा सरकार को भारी पड़ेगी
Farmers Protest Day 270 (मेरा हरियाणा नेटवर्क)बाढड़ा। कृषि क्षेत्र में लगातार प्राकृतिक आपदा के बाद अब किसानों की कमर टूट चुकी है और वह कर्ज के दल दल में फंस रहा है जिसके लिए सरकार को तत्काल प्रभाव से कदम उठाने की जरुरत है। सरकार किसानों के हितों की रक्षा के नाम केवल दिखावा कर रही है। वर्ष 2023 के रबी व खरीफ सीजन की फसलों के बीमा मुआवजे की जांच व भरपाई के लिए किसी भी संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
किसान अपके हकों के लिए कितने भी लंबे संघर्ष से जूझना पड़े वह पीछे नहीं हटेंगे
यह बात किसान सभा के पूर्व अध्यक्ष रघबीर श्योराण काकड़ौली ने कस्बे की अनाज मंडी के सामने पूर्व थानेदार जोरासिंह की अध्यक्षता में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा वर्ष 2023 के बकाया मुआवजे को लेकर संचालित धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विधानसभा बजट सत्र में किसानों की बकाया मुआवजा जैसे ज्वलंत मसले का समाधान तो दूर पक्ष, विपक्ष द्वारा चर्चा न होना अन्नदाता का अपमान है। किसान अपके हकों के लिए कितने भी लंबे संघर्ष से जूझना पड़े वह पीछे नहीं हटेंगे और सरकार को झूकने पर मजबूर कर देंगे।
उन्होंने कहा कि किसानों के हकों व बाढड़ा के आत्म स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष को कभी कमजोर नहीं रहने दिया गया है जो भविष्य में और मजबूत होगा। बड़ा दुर्भाग्य है कि किसान को खाद बीज से लेकर फसल बिक्री या मुआवजे के लिए भुखा रहकर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है वहीं व्यापारियों का करोड़ों अरबों रुपयों का जुर्माना एक कलम से माफ कर दिया जाता है।
किसान की पत्नि को लाडो लक्ष्मी में शामिल कर दिया तो उनकी कपास, बाजरा की फसलों के भावों में कमी कर दी जिससे सरकार के खजाने पर कोई बोझ नहीं पड़ा बल्कि सरकार को करोड़ों की बचत जरुर हुई है। केन्द्र व प्रदेश में पहली बार इतनी गुंगी बहरी सरकार है कि किसान अपने हितों के लिए सडक़ों पर आंदोलन करने को मजबूर है सरकार जनता के पैसे को उत्सवों पर उड़ा रही है। बाढड़ा की भूमि ने पहले भी किसान मजदूर के हकों के लिए कई कुर्बानी दी हैं और भविष्य में भी सरकार ने हठ्धर्मिता नहीं छोड़ी तो सरकार से सीधी टक्कर लेकर किसी भी बड़े बलिदान से पीछे नहीं हटेंगे।
बकाया मुआवजे को लेकर क्षेत्र के किसान पिछले 262 दिनों से धरनारत
वर्ष 2023 के रबी व खरीफ सीजन की फसलों के बीमा मुआवजे की जांच व भरपाई के लिए किसी भी संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। मौजूदा सरकार किसान व कृषि व्यवस्था को कमजोर कारपोरेट घरानों को बढावा दे रही है जो हमारी पीढी के लिए न्यायसंगत नहीं है। आज किसान को डीएपी व यूरिया के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है वहीं करोड़ों रुपयों की राशी जमा करवाने के बावजूद उनके ट्यूबवैलों को कनैक्षन नहीं मिल रहा है। बकाया मुआवजे को लेकर क्षेत्र के किसान पिछले 262 दिनों से धरनारत हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार उनकी मांग सुनने की बजाए अनदेखी कर रही है।
आज के धरने पर नरेश कादयान, मा. रघबीर श्योराण, किसान नेता राजकुमार हड़ौदी, किसान सभा खंड अध्यक्ष नसीब मोद, प्रताप सिंह हंसावास, प्रताप सिंह, पारस काकडौली, धर्मपाल पीटीआई व ब्रहमपाल बाढड़ा, युदवीर सिंह, ओमप्रकाश नंबरदार चरखी, महावीर सिंह, प्राचार्य हवा सिंह, नरेश कुमार कादयान, जयवीर नाधां, सतबीर पीटीआई, धर्मपाल बाढड़ा, ओमप्रकाश कारी दास, सीटू नेता सुमेर सिंह, श्रमिक नेता रोशन लाल धारणी, कामरेड रामपाल धारणी, मास्टर रघवीर सिंह, ब्रह्मपाल बाढडा, भूप सिंह धारणी, होशियार सिंह, सत्य प्रकाश जेवली, रणधीर सिंह, हवा सिंह, प्रताप सिंह, जोरा सिंह इत्यादि मौजूद रहे।














