Haryana News: हरियाणा सरकार ने जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इसके तहत अब पैरोल, फरलो या अंतरिम जमानत से लौटने वाले हर कैदी की 24 घंटे के भीतर व्यापक मेडिकल जांच अनिवार्य कर दी गई है।
नई व्यवस्था केवल लौटने वाले कैदियों तक सीमित नहीं है। पुलिस हिरासत से वापस आने वाले, अस्पताल में भर्ती होकर लौटने वाले तथा अन्य जेलों से स्थानांतरित होकर आने वाले कैदियों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य की 20 जेलों में 512 कैदी एचआईवी संक्रमित हैं, जबकि 83 कैदी तपेदिक (टीबी) से पीड़ित हैं। इसके अलावा 352 कैदियों में मादक पदार्थों की लत पाई गई है और अब तक 1263 कैदियों का नशामुक्ति उपचार किया जा चुका है। ये आंकड़े जेलों में मजबूत स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
नई SOP के तहत मेडिकल जांच को अधिक व्यापक बनाया गया है। अब केवल सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं, बल्कि शरीर के प्रमुख अंगों की विस्तृत जांच की जाएगी। इसमें रक्त और मूत्र परीक्षण, नशे की लत की स्क्रीनिंग, आवश्यकता अनुसार छाती का एक्स-रे तथा टीबी की जांच शामिल होगी।
साथ ही, सभी नए कैदियों के लिए हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसी संक्रामक बीमारियों की अनिवार्य लैब जांच भी की जाएगी। जिन मामलों में संक्रमण की पुष्टि होगी, उन्हें आगे के इलाज और निगरानी के लिए विशेष चिकित्सा केंद्रों में भेजा जाएगा।
जेल विभाग के महानिदेशक आलोक मित्तल ने बताया कि पहले कैदियों के प्रवेश के समय चिकित्सा जांच अनियमित रूप से होती थी, लेकिन अब इस प्रक्रिया को व्यवस्थित और अनिवार्य बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे समय पर उपचार सुनिश्चित होगा और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त कैदियों की पहचान कर उन्हें आवश्यकतानुसार अलग रखा जा सकेगा।
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