Haryana News: हरियाणा में निजी बस संचालकों की मनमानी और रियायती पास धारकों को बस में चढ़ाने से इनकार की बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि राज्य के सभी निजी स्टेज कैरिज बस संचालकों को अब हरियाणा रोडवेज की तर्ज पर सभी श्रेणियों के ‘फ्री’ और ‘कन्सेशनल’ पास धारकों को यात्रा की सुविधा देनी होगी।
इस संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय की ओर से सभी जिला परिवहन अधिकारियों (डीटीओ)-सह-सचिवों को पत्र जारी किया गया है। आदेश के अनुसार यदि कोई निजी बस संचालक पास होने के बावजूद किसी यात्री को बस में चढ़ने से रोकता है, तो उसके खिलाफ संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) या विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
सरकार ने साफ किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और इसके दायरे में प्रदेशभर में संचालित करीब 1750 निजी बसें आएंगी। ‘स्टेज कैरिज स्कीम 2016’ की शर्तों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के निर्देशों की मुख्य बातें
नए आदेश के तहत निजी बसों को छात्रों, दिव्यांगों, बुजुर्गों और अन्य रियायती पास धारकों को उसी तरह यात्रा की सुविधा देनी होगी, जैसे हरियाणा रोडवेज की बसों में दी जाती है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था के बदले निजी बस संचालकों को किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह उनके परमिट की शर्तों का हिस्सा है। विभाग ने 2017 के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा है कि परमिट धारक इन नियमों का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।
शिकायतों के बाद सख्ती
परिवहन विभाग के सुपरिटेंडेंट बलजिंदर सिंह के अनुसार विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी बस चालक छात्रों और बुजुर्गों को पास होने के बावजूद बस में नहीं बैठाते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित अधिकारियों और बस संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निजी बस ऑपरेटरों की नाराजगी
वहीं, स्टेट गैरिज ट्रांसपोर्ट सोसायटी एंड प्राइवेट बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन ने इस आदेश का विरोध किया है। एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. धन सिंह का कहना है कि रोडवेज विभाग स्वयं पास जारी कर उससे संबंधित भुगतान प्राप्त करता है, ऐसे में निजी बस संचालकों पर मुफ्त यात्रा का बोझ डालना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना आर्थिक मुआवजे के यह व्यवस्था उनके लिए घाटे का सौदा साबित होगी।
हाईकोर्ट में भी मामला लंबित
गौरतलब है कि कुछ माह पहले हिसार की अदालत ने एक मामले में निर्देश दिया था कि जब तक उच्च न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं आता, तब तक निजी बसों में भी सरकारी रियायती पास मान्य रहेंगे। यह आदेश एक लॉ छात्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिसमें निजी बसों में सरकारी पास को मान्यता देने की मांग की गई थी।
हालांकि, निजी बस संचालकों ने इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया है, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। ऐसे में सरकार के नए आदेश के बाद अब पूरे राज्य में इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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