- बच्चे समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील सदस्य: डॉ. मंगल सेन
One day training workshop organized on POCSO Act : (मेरा हरियाणा नेटवर्क ) नारनौल।
जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से पंचायत भवन में पोक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम एवं साइबर क्राइम विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगराधीश डॉ. मंगल सेन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन से संबंधित पोस्टर भी जारी किया।
अपने संबोधन में डॉ. मंगल सेन ने कहा कि बच्चे समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील सदस्य होते हैं तथा उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम का उद्देश्य बच्चों का सुधार एवं पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा है और बच्चों से संबंधित किसी भी घटना की सूचना टोल फ्री नंबर 1098 या 112 पर दी जा सकती है।
उन्होंने बच्चों के साथ होने वाले साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और साइबर अपराधों के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यशाला में सहायक जिला न्यायवादी नवीन श्योराण ने पोक्सो एक्ट की जानकारी दी, जबकि साइबर क्राइम थाना से एसआई इंद्रजीत ने साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए। सामाजिक कार्यकर्ता कमल ने किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। मंच संचालन डॉ. पंकज गौड़ ने किया।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी विशेश्वर कौशिक, सहायक जिला न्यायवादी रफीक, संरक्षण अधिकारी एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा, एलपीओ राजकुमार कोठारी, बाल संरक्षण अधिकारी संतोष कुमारी, बाल संरक्षण अधिकारी सुषमा, लेखाकार प्रेमलता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
बच्चों के खिलाफ अपराध एवं निर्धारित दंड
जिला बाल संरक्षण अधिकारी संदीप ने बताया कि किसी भी पीड़ित या देखरेख की आवश्यकता वाले बालक की पहचान, नाम, पता या फोटो को समाचार पत्र या चैनल पर उजागर करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए छह माह की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
बच्चों के साथ क्रूरता, दुर्व्यवहार या उत्पीड़न करने पर तीन वर्ष की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। यदि यह अपराध किसी संस्था के कर्मचारी द्वारा किया जाता है तो पांच वर्ष की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बिना अधिकृत चिकित्सक के आदेश के बच्चे को नशीला पदार्थ देने या दिलवाने पर सात वर्ष की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। बच्चों से भीख मंगवाने पर पांच वर्ष की सजा व एक लाख रुपये जुर्माना निर्धारित है। बच्चों को अंगभंग करने पर न्यूनतम सात वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
बच्चों के कल्याण से संबंधित स्पॉन्सरशिप स्कीम
स्पॉन्सरशिप योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं के बच्चों, अनाथ बच्चों तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित अभिभावकों के स्कूल जाने वाले बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012
पॉक्सो एक्ट का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न एवं अश्लील साहित्य से जुड़े अपराधों से संरक्षण प्रदान करना तथा ऐसे मामलों के त्वरित निपटान के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना करना है।












