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Faridabad Rain Effect: फरीदाबाद के मंझावली गांव में मानसून की पहली तेज बारिश किसानों के लिए आफत बन गई. चार-चार एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई, वहीं ज्वार और पशुओं का चारा भी बर्बाद हो गया. पिछले साल यमुना की बाढ़ का नुकसान झेल चुके किसान इस बार भी भारी नुकसान से चिंतित हैं.
फरीदाबाद: मानसून की बारिश का इंतजार हर किसान करता है. लेकिन फरीदाबाद के मंझावली गांव में यही बारिश कई किसानों के लिए मुसीबत बन गई. जिले में लगातार हुई तेज बारिश से जहां शहर के कई सेक्टर और सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई, वहीं मंझावली गांव के खेत भी पानी में डूब गए. जिन किसानों ने कुछ दिन पहले ही धान की रोपाई की थी, उनकी फसल पहली ही बारिश में पानी के नीचे चली गई. पिछले साल यमुना की बाढ़ से नुकसान झेल चुके किसान इस बार फिर चिंता में हैं. किसानों का कहना है कि खेती की शुरुआत में ही इतना नुकसान हो गया तो आगे का समय कैसे निकलेगा.
Local18 से बातचीत में खेत में काम कर रहीं महिला किसान विजय बताती हैं कि मैंने 4 एकड़ में धान लगाया है. लगातार हो रही बारिश की वजह से पूरा खेत पानी से भर गया और धान डूब गया. पिछले साल बाढ़ में भी फसल खराब हो गई थी और इस बार पहली ही बारिश में नुकसान हो गया. एक एकड़ में करीब 15 हजार रुपये की लागत आती है. इतनी मेहनत के बाद अगर फसल शुरू में ही डूब जाए, तो बहुत परेशानी होती है. यह बारिश हमारे लिए आफत बनकर आई है.
बारिश का था बेसब्री से इंतजार
किसान सुनीता देवी बताती हैं कि मैं करीब 15 साल से धान की खेती कर रही हूं. मेरी उम्र 45 साल है. पहली बारिश का इंतजार करते थे ताकि फसल अच्छी हो, लेकिन इस बार बारिश इतनी ज्यादा हो गई कि धान ही पानी में डूब गया. मैंने 4 एकड़ में 1121 वैरायटी का धान लगाया है. एक एकड़ में करीब 18 हजार रुपये की लागत आती है. खेती की शुरुआत में ही इतना नुकसान हो गया, अब आगे की चिंता बढ़ गई है.
डूब गया भैसों का चारा
मंझावली गांव की रहने वाली भानु बताती हैं कि मेरे खेत में इतना पानी भर गया है कि भैंसों का चारा भी डूब गया. ज्वार की फसल भी पानी में खराब हो गई. आगे जो तालाब है, उसमें पानी नहीं जा रहा है. पूरा पानी खेतों में ही जमा हो रहा है. इसी वजह से धान की फसल भी डूब गई. अगर जल्दी पानी नहीं निकला, तो नुकसान और बढ़ जाएगा.
मंझावली गांव के किसानों का कहना है कि बारिश खेती के लिए जरूरी होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश अब मुश्किल बनती जा रही है. पिछले साल बाढ़ से नुकसान हुआ था और इस बार मानसून की शुरुआत में ही खेत पानी में डूब गए.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें











