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Study Vastu Remedies : मोबाइल ने बच्चों की पढ़ाई को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. कई बच्चे किताब खोलकर बैठते तो हैं, लेकिन कुछ ही देर में उनका ध्यान मोबाइल की तरफ चला जाता है. ऐसे में माता-पिता परेशान होकर बच्चों को डांटने लगते हैं. अंबाला के एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव लोकल 18 से बताते हैं कि इस समस्या का समाधान निकालने के लिए बच्चे की आदतों और उसके व्यवहार को समझना ज्यादा जरूरी है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु, केतु और शनि की महादशा के दौरान कुछ बच्चों के व्यवहार में बदलाव, जिद और बेचैनी जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं.
अंबाला. आजकल बच्चों को पढ़ाई के लिए बैठाना माता-पिता के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. कई बच्चे किताब खोलकर बैठते तो हैं, लेकिन कुछ ही देर में उनका ध्यान मोबाइल, गेम और सोशल मीडिया की तरफ चला जाता है. कुछ बच्चे घंटों पढ़ाई करने के बावजूद परीक्षा में आत्मविश्वास महसूस नहीं कर पाते. ऐसे में माता-पिता परेशान होकर बच्चों को डांटने लगते हैं. हालांकि, समस्या का समाधान निकालने के लिए बच्चे की आदतों और उसके व्यवहार को समझना ज्यादा जरूरी है. अंबाला के एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव लोकल 18 से बताते हैं कि बच्चों का स्वभाव काफी हद तक उनके पारिवारिक माहौल और माता-पिता से मिलने वाले संस्कारों से प्रभावित होता है. बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देने चाहिए. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु, केतु और शनि की महादशा के दौरान कुछ बच्चों के व्यवहार में बदलाव, जिद और बेचैनी जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं.
दूर्वा अर्पित करने की सलाह
कुमार गौरव के मुताबिक शिक्षा के मामले में बुध ग्रह को महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, तर्क और संवाद क्षमता से जोड़कर देखा जाता है. बुध से जुड़े उपाय करने के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जा सकती है. एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव के अनुसार, ज्योतिषीय मान्यता में तांबे के छेद वाले सिक्के को सफेद धागे में डालकर बुधवार या रविवार को धारण करने का उपाय बताया जाता है. बच्चों को भगवान गणेश की पूजा करने और उन्हें दूर्वा अर्पित करने की सलाह भी दी जाती है. मान्यता है कि इससे पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने और एकाग्रता में मदद मिल सकती है. हालांकि, बच्चों की पढ़ाई में सुधार के लिए नियमित अभ्यास और सही दिनचर्या पर ध्यान देना भी जरूरी है.
कुमार गौरव बताते हैं कि आजकल मोबाइल बच्चों का ध्यान भटकाने की प्रमुख वजहों में से एक है. कई बार बच्चे होमवर्क करने के बहाने मोबाइल लेते हैं, लेकिन फिर वीडियो और गेम में व्यस्त हो जाते हैं. इससे पढ़ाई के लिए मिलने वाला समय कम हो सकता है. ऐसे में माता-पिता को मोबाइल इस्तेमाल करने की समय-सीमा तय करनी चाहिए और पढ़ाई के दौरान फोन को दूर रखना चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पढ़ाई की जगह साफ-सुथरी और व्यवस्थित होनी चाहिए. बच्चों के लिए एक निश्चित स्टडी टेबल बनाना उपयोगी हो सकता है, ताकि वे नियमित रूप से एक ही जगह बैठकर पढ़ने की आदत विकसित कर सकें.
कठिन विषयों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें
वास्तु की मान्यताओं में उत्तर दिशा में बैठकर पढ़ाई करने को भी शुभ माना जाता है. कुमार गौरव कहते हैं कि बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए रोजाना का टाइम टेबल बनाएं और पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक दें और कठिन विषयों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाएं. पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और शांत माहौल भी मददगार हो सकते हैं. अगर बच्चा लंबे समय तक ध्यान नहीं लगा पा रहा है या पढ़ाई में लगातार परेशानी हो रही है, तो शिक्षक और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लें. बच्चों को डांटने या मारने के बजाय प्रोत्साहित करना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में अधिक सहायक हो सकता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…










