Last Updated:
Ambala News: कई क्षेत्रों में धान की फसल में बैक्टीरिया जनित झुलसा रोग (बीएलबी) और पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट के लक्षण दिखाई देने के बाद कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है. इन रोगों से फसल को बचाने के लिए किसान ने खास सलाह दी है.
अंबाला: इस बार मानसून की सुस्त चाल अब किसानों की चिंता का कारण बनने लगी है, क्योंकि जिले में अपेक्षा के अनुरूप बारिश नहीं होने और मौसम में लगातार नमी व तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण धान की फसल पर रोग और कीटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. कई क्षेत्रों में धान की फसल में बैक्टीरिया जनित झुलसा रोग (बीएलबी) और पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट के लक्षण दिखाई देने के बाद कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है.
बता दें कि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए खेतों की नियमित निगरानी और शुरुआती अवस्था में ही उपचार करने की सलाह दी है, ताकि उत्पादन पर किसी प्रकार का बड़ा असर न पड़े. कृषि विभाग के अनुसार, बैक्टीरिया जनित झुलसा रोग धान की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है. इसकी शुरुआत पत्तियों के किनारों और सिरों के पीले पड़ने से होती है. धीरे-धीरे पत्तियां सूखकर भूरे या सफेद रंग की दिखाई देने लगती हैं और उनके किनारे लहरदार हो जाते हैं. यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया जाए तो यह बीमारी तेजी से पूरी फसल में फैलकर उत्पादन को प्रभावित कर सकती है.
किसानों के लिए फसल बचाने की खास सलाह
वहीं दूसरी ओर पत्ती लपेटक कीट भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है. इस कीट की इल्ली पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाती है और हरे भाग को खुरचकर खाती है. इसके कारण पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देने लगती हैं और दूर से पूरी फसल झुलसी हुई नजर आती है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि शुरुआती अवस्था में 20 से 25 मीटर लंबी रस्सी को दो व्यक्तियों की ओर से खेत के ऊपर से खींचा जाए. इससे लपेटी हुई पत्तियां खुल जाती हैं और इल्लियां नीचे पानी में गिरकर नष्ट हो जाती हैं, जिससे प्रकोप काफी हद तक कम किया जा सकता है.
‘डेड हार्ट’ फसल को पहुंचाता नुकसान
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला कृषि विभाग के डीडीए जसविंदर सिंह ने बताया कि इस बार कम बारिश के चलते धान की फसल में पत्ता लपेटक और व्हाइट स्टेम बोरर का असर बढ़ रहा है. पत्ता लपेटक की सुंडी सामान्य तौर पर कमजोर होती है और अच्छी बारिश होने पर वह समाप्त हो जाती है, लेकिन व्हाइट स्टेम बोरर से बनने वाला ‘डेड हार्ट’ फसल को अधिक नुकसान पहुंचाता है. इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे कृषि विभाग की ओर से अनुशंसित दवाइयों का समय पर प्रयोग करें.
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव जाकर फसलों का निरीक्षण और सर्वे कर रही हैं. यदि किसी किसान को अपनी फसल में रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें तो वह बिना देरी किए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से संपर्क करें. उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों ने धान की रोपाई देर से की है, वे अपने खेतों में संतुलित मात्रा में पानी बनाए रखें, ताकि पौधों का विकास प्रभावित न हो.
यूरिया सहित नाइट्रोजन उर्वरक का करें प्रयोग
उन्होंने बताया कि जिले के कई गांवों में झुलसा रोग और पत्ती लपेटक की शिकायतें सामने आई हैं. झुलसा रोग दिखाई देने पर किसान तुरंत यूरिया सहित नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग बंद कर दें. खेत में जमा अतिरिक्त पानी निकालकर कुछ समय तक खेत को सूखने दें और बाद में आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें. उन्होंने कहा कि झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में 6 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड मिलाकर छिड़काव करना प्रभावी रहेगा.
वहीं पत्ती लपेटक की रोकथाम के लिए कारटप हाइड्रोक्लोराइड 4जी जीआर की 7.5 किलोग्राम मात्रा को 10 किलोग्राम रेत में मिलाकर रोपाई के लगभग 30 दिन बाद खेत में डालने की सलाह दी गई है. कृषि विभाग का कहना है कि यदि किसान समय रहते रोग और कीट की पहचान कर उचित प्रबंधन अपनाएं तो धान की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है और अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है.
About the Author

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
और पढ़ें













