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Faridabad News: फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में पंचायत की जमीन पर प्रस्तावित पुलिस लाइन को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है. ग्रामीणों का कहना है कि यहां इस जमीन पर अस्पताल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या स्टेडियम बना दिया जाए, लेकिन पुलिस लाइन की मंजूरी नहीं देंगे.
फरीदाबाद: फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में पंचायत की जमीन पर प्रस्तावित नई पुलिस लाइन को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि जमीन गांव की है तो इस्तेमाल भी ऐसा होना चाहिए, जिससे पूरे इलाके का भला हो. सरकार की ओर से सुनपेड़ की पंचायती भूमि पर नई पुलिस लाइन बनाने की योजना को स्वीकृति मिलने के बाद विरोध शुरू हुआ. कुछ दिन पहले गांव की वाटिका में पंचायत कर ग्रामीणों ने पुलिस लाइन के खिलाफ आवाज उठाई. अब कल डीसी को ज्ञापन भी दिया है.
Local18 से बातचीत में किसान नेता बबलू हुड्डा बताते हैं कि ग्राम पंचायत के साथ पूरा गांव एकजुट होकर पुलिस लाइन का विरोध कर रहा है. मेरी मांग है कि यहां अस्पताल बनाया जाए या कोई बड़ा कॉलेज और विश्वविद्यालय खोला जाए. अगर स्टेडियम बनाया जाता है तो गांव और आसपास के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी. अस्पताल बनेगा तो आसपास के लोगों को इलाज की सुविधा मिलेगी और शिक्षण संस्थान बनेगा तो युवाओं के भविष्य को नई दिशा मिलेगी. पंचायत की जमीन पर ऐसा संस्थान बनना चाहिए, जिसका सीधा फायदा जनसेवा में दिखाई दे.
सुनपेड़ में दोबारा पुलिस लाइन क्यों?
बबलू हुड्डा बताते हैं कि पुलिस लाइन बनने से गांव के विकास का कोई बड़ा आधार नहीं बनेगा. लोगों के नजरों में पुलिस की छवि अच्छी नहीं है और इसी वजह से ग्रामीण पुलिस लाइन नहीं चाहते हैं. फरीदाबाद जिले में पहले से पुलिस लाइन मौजूद है तो फिर सुनपेड़ में दोबारा पुलिस लाइन क्यों बनाई जा रही है. मेरी मांग है कि ग्राम पंचायत की जमीन पर ग्रामीणों के ऊपर कोई फैसला थोपा नहीं जाए. यह जमीन ग्राम पंचायत सुनपेड़ की है और इसका इस्तेमाल गांव और आसपास के लोगों के हित में होना चाहिए. इसी मांग को लेकर डीसी को ज्ञापन भी दिया गया है.
कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल बनाने की मांग
मास्टर देवी सिंह लांबा बताते हैं कि ग्रामीणों की मांग बिल्कुल जायज है. गांव में अस्पताल या शिक्षण संस्थान बनता है तो आने वाली पीढ़ी के लिए यह बहुत अच्छा रहेगा. पुलिस लाइन बनने से ग्रामीणों को कोई खास फायदा नहीं होगा. जब जमीन हमारी जा रही है तो मेरी मांग है कि यहां ऐसा संस्थान बने, जिसका फायदा गांव के लोगों को मिले. कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल बनने से युवाओं और आम लोगों का भविष्य बेहतर हो सकता है.
मास्टर देवी सिंह लांबा बताते हैं कि जमीन के मुआवजे को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है. आज के समय में 4 करोड़ रुपये जमीन के रेट के हिसाब से कुछ भी नहीं है. जमीन की कीमत काफी ज्यादा है और मुआवजा उसके मुकाबले कम दिया जा रहा है. ग्रामीणों को लगता है कि जमीन को लेकर सही कीमत नहीं लगाई गई है. सरकार को ग्रामीणों की बात सुननी चाहिए और जमीन के इस्तेमाल और मुआवजे दोनों पर दोबारा विचार करना चाहिए.
जमीन के रेट से घटाकर मिल रहा मुआवजा
कैलाश बताते हैं कि फरीदाबाद जिले में पुलिस लाइन पहले से मौजूद है तो सुनपेड़ में दोबारा पुलिस लाइन क्यों बनाना चाहते हो. मेरी मांग है कि यहां कॉलेज दे दो, अस्पताल दे दो या कोई बड़ा स्टेडियम बना दो. पुलिस लाइन को छोड़कर कुछ भी ऐसा बनाया जाए, जिससे गांव के लोगों को फायदा हो. जमीन का मुआवजा भी मौजूदा रेट के मुकाबले काफी कम है. 13 करोड़ रुपये के हिसाब से जमीन बिक चुका है, जबकि करीब 4 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है. करीब 10 साल पहले भी 10 करोड़ रुपये के हिसाब से जमीन बिक चुका है.
कैलाश बताते हैं कि ग्रामीणों की सिर्फ एक ही मांग है कि सुनपेड़ की पंचायत भूमि पर पुलिस लाइन नहीं बननी चाहिए. अगर सरकार यहां कोई संस्थान बनाना चाहती है तो अस्पताल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या स्टेडियम बनाए इससे सुनपेड़ के साथ आसपास के गांवों के लोगों को भी फायदा मिलेगा. पंचायत की जमीन का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए और ग्रामीणों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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