मिट्टी के ढेर से गणपति बप्पा तक का सफर, 35 साल से एक परिवार गढ़ रहा आस्था की तस्वीर

On: September 10, 2026 10:12 AM
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अंबाला: गणेश चतुर्थी का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों में गणपति बप्पा की अलग-अलग रूप और रंग वाली प्रतिमाएं नजर आने लगी हैं. कहीं गणेश जी पारंपरिक स्वरूप में दिखाई दे रहे हैं तो कहीं उनका आधुनिक और आकर्षक रूप भक्तों को अपनी ओर खींच रहा है. लेकिन अंबाला के बाजार में कुछ ऐसी प्रतिमाएं भी हैं, जिनके पीछे सिर्फ मिट्टी और रंग नहीं, बल्कि 35 साल की मेहनत, परिवार की कला और भगवान गणेश के प्रति गहरी आस्था जुड़ी हुई है.

बता दें कि अंबाला में पिछले करीब 35 वर्षों से जयपुर, राजस्थान का एक परिवार भगवान श्री गणेश की सुंदर प्रतिमाएं तैयार कर रहा है. मूर्तिकार रमेश और उनका परिवार चिकनी मिट्टी और चाक मिट्टी से गणेश जी की ऐसी प्रतिमाएं तैयार करते हैं, जिन्हें लेने के लिए हर साल दूर-दूर से भक्त अंबाला पहुंचते हैं.

35 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहा परिवार

मूर्तिकार रमेश लोकल 18 को बताते हैं कि मूर्ति बनाने की कला उनके परिवार के लिए कोई नया काम नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है. उनके पूर्वज राजस्थान में पत्थरों पर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाया करते थे. समय के साथ परिवार ने मिट्टी की मूर्तियां बनानी शुरू कीं और करीब 35 साल पहले अंबाला को अपनी कर्मभूमि बना लिया.

उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी से करीब चार महीने पहले ही उनके परिवार के हाथ मिट्टी से खेलने लगते हैं और धीरे-धीरे मिट्टी का एक साधारण ढेर भगवान गणेश के मनमोहक स्वरूप में बदल जाता है. परिवार के बेटे और बहू भी इस काम में उनका हाथ बंटाते हैं. यानी एक प्रतिमा तैयार होने के पीछे पूरे परिवार की मेहनत और कई दिनों का समय लगा होता है.

2 से 10 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं तैयार

रमेश ने बताया कि इस बार उन्होंने करीब 2 फीट से लेकर 10 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं. इनमें कई डिजाइन भक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

उन्होंने बताया कि इस बार मोरपंखी गणेश, भगवान शिव के स्वरूप में गणेश, शेषनाग के साथ गणेश और मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के बादशाह की तर्ज पर तैयार की गई प्रतिमाएं लोगों को काफी पसंद आ रही हैं. वहीं, महाराष्ट्र की संस्कृति से जुड़े ‘मूषक राजा’ डिजाइन वाली गणेश प्रतिमाएं भी भक्तों का ध्यान खींच रही हैं.

हर साल तैयार करते हैं नए डिजाइन

रमेश बताते हैं कि वह हर साल करीब 10 से 12 अलग-अलग डिजाइन तैयार करते हैं, ताकि भक्तों को कुछ नया और अलग देखने को मिले. इस बार भगवान भोलेनाथ के रूप से प्रेरित गणेश प्रतिमा भी तैयार की गई है.

अंबाला के अलावा दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं भक्त

रमेश की बनाई प्रतिमाओं की मांग सिर्फ अंबाला या हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी लोग गणेश प्रतिमाएं लेने के लिए यहां पहुंचते हैं. खासकर महाराष्ट्र से जुड़े ऐसे लोग, जो अंबाला में सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे हर साल रमेश के यहां से गणपति बप्पा की प्रतिमा लेकर जाते हैं.

मूर्ति बनाना सिर्फ रोजी-रोटी नहीं, आस्था भी

रमेश कहते हैं कि उनके लिए यह सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया नहीं है. जब कई दिनों की मेहनत के बाद मिट्टी से भगवान गणेश का चेहरा आकार लेता है और कोई भक्त उसे अपने घर ले जाने के लिए चुनता है, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे उनकी मेहनत सफल हो गई.

उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी के बाद भी उनके परिवार के हाथ रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि दिवाली के लिए अब लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं और अलग-अलग डिजाइन की सजावटी वस्तुएं तैयार की जाएंगी. यही कला उनके परिवार की रोजी-रोटी भी है और पीढ़ियों से चली आ रही उनकी पहचान भी.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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