हरियाणा में पंचायती जमीन पर मालिकाना हक लेने की प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रदेश के 21 जिलों से आए 450 आवेदनों में से 350 आवेदन अधूरे पाए गए हैं। पंचायती राज निदेशालय ने इन अधूरे आवेदनों को संबंधित जिला उपायुक्तों को वापस लौटा दिया है।
अब आवेदकों को 30 दिन के भीतर आवश्यक दस्तावेज पूरे कर दोबारा आवेदन करना होगा। यदि तय समय सीमा में दस्तावेज पूरे नहीं किए गए तो संबंधित व्यक्ति को मालिकाना हक नहीं मिलेगा।
जुलाई 2024 में लिया गया था फैसला
राज्य सरकार ने जुलाई 2024 में निर्णय लिया था कि पंचायत की 500 गज तक की भूमि पर कब्जाधारकों को मालिकाना हक दिया जाएगा। यह सुविधा उन लोगों के लिए है जिनके पक्के रिहायशी मकान 31 मार्च 2024 से पहले बने हुए हैं या जो 20 वर्ष से अधिक समय से उस जमीन पर काबिज हैं।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। संबंधित जिला उपायुक्त आवेदन को जांच के बाद पंचायती राज निदेशालय को भेजते हैं।
मालिकाना हक के लिए जरूरी शर्तें
योजना के तहत कुछ अहम शर्तें निर्धारित की गई हैं:
जमीन पंचायत की सीमा के भीतर होनी चाहिए।
जमीन पर कम से कम 80 प्रतिशत तक पक्का निर्माण होना अनिवार्य है।
ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का प्रस्ताव आवेदन के साथ संलग्न होना चाहिए।
जमाबंदी की प्रति के साथ संबंधित मकान का फोटो प्रमाण के रूप में लगाना आवश्यक है।
आवेदन के बाद खंड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाता है और उनकी रिपोर्ट भी संलग्न करनी होती है।
दस्तावेज अधूरे होने से अटका मामला
पंचायती राज विभाग के अनुसार अधिकांश आवेदनों में या तो ग्राम पंचायत का प्रस्ताव संलग्न नहीं था, या निर्माण से संबंधित प्रमाण अधूरे थे। कई मामलों में निरीक्षण रिपोर्ट भी नहीं जोड़ी गई थी। इसी कारण 350 आवेदन वापस कर दिए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम अवसर है। यदि 30 दिन के भीतर आवेदन पूर्ण दस्तावेजों सहित दोबारा जमा नहीं किए गए, तो संबंधित लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लेकर लोगों में उत्साह है, लेकिन दस्तावेजी औपचारिकताओं में लापरवाही उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है। अब देखना होगा कि तय समय सीमा में कितने लोग अपने आवेदन पूरे कर पाते हैं।











