Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को एक विश्वस्तरीय नॉलेज इकॉनोमी हब के रूप में स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से राज्य के शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को री-डिजाइन, री-इमेजिन और री-इन्वेस्ट के सिद्धांत पर नया आकार दिया जा रहा है। इसके तहत राज्य के विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप व्यापक सुधार लागू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार में आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 7 करोड़ 58 लाख रुपए के उदघाटन एवं शिलान्यास किए, इनमें 6 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले कन्या छात्रावास का शिलान्यास, स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में 1.40 करोड़ रुपए से बने नर्सिंग विभाग के भवन का उद्घाटन और 18 लाख रुपए की लागत से बने खेजड़ली महाबलिदान स्मृति शिल्प एवं माता अमृता देवी सर्कल का लोकार्पण किया। उन्होंने नर्सिंग ब्लॉक का नाम चौधरी भजनलाल के नाम पर रखने की घोषणा की।
एनईपी उत्कृष्ट क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय को एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से नवाजा गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। इसका विजन भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में इस विश्वविद्यालय ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके लिए विश्वविद्यालय को हरियाणा सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति इम्प्लीमेंटेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2025 गोल्ड कैटेगरी से नवाजा गया है। यह गर्व एवं गौरव की बात है।
भारत की संस्कृति प्रकृति अस्तित्व की चेतना
उन्होंने गुरु जंभेश्वर महाराज और बिश्नोई समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति का अस्तित्व बहुत महत्व रखता है, जिसका प्रतिनिधित्व गुरु जंभेश्वर जी महाराज ने अपने जीवन और उपदेशों में किया। गुरु जंभेश्वर की शिक्षाओं के अनुरूप ही डबल इंजन की सरकार प्रकृति के साथ संतुलन बैठाकर हरियाणा को विकास की नई बुलंदियों पर ले जाने का काम कर रही है। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरु जंभेश्वर महाराज के द्वारा प्रतिपादित 29 नियम केवल किसी धार्मिक पंथ के अनुशासन नहीं हैं। ये नियम मानव जीवन, पर्यावरण संतुलन, सामाजिक समरसता, जैव विविधता, पशु-करुणा, जल संरक्षण, स्वच्छता, संयम और नैतिक जीवन के अमूल्य सिद्धांत हैं। ये नियम आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पांच सौ वर्ष पहले थे।
गत वर्ष हरियाणा में 20 करोड़ रुपये का हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष बनाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में राज्यभर के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से 350 से अधिक अनुसंधान प्रस्ताव प्राप्त हुए। लगभग 90 शोध प्रस्तावों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसलिए हमने इस वित्त वर्ष में भी 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि इस कोष को देने का प्रावधान किया है।










