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Faridabad News: फरीदाबाद में 44 वर्षीय महिला के पेट से 7 किलो और 41 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर सफल सर्जरी से निकाला गया. महीनों तक वह बढ़ते पेट और कब्ज को सामान्य मोटापा समझती रहीं. चार घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद अब महिला पूरी तरह स्वस्थ हैं.
फरीदाबाद: फरीदाबाद की 44 साल की एक महिला कई महीनों से अपना बढ़ता पेट और कब्ज जैसी परेशानी को सामान्य बात समझकर नजरअंदाज करती रही. उन्हें लगा कि उम्र और वजन बढ़ने की वजह से पेट निकल रहा है. लेकिन जब चलने-फिरने में दिक्कत बढ़ी और जांच कराई गई, तो डॉक्टर भी हैरान रह गए. महिला के पेट में गर्भाशय और अंडाशय के बीच करीब 41 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर था, जिसका वजन लगभग 7 किलो था. चार घंटे चली मुश्किल सर्जरी के बाद इस ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया. अब महिला पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही है.
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक के वरिष्ठ सलाहकार लेजर और जनरल सर्जरी के सर्जन डॉ. बीरबल कुमार बताते हैं कि जब महिला अस्पताल पहुंची, तो पहली नजर में लगा कि उनका वजन सामान्य तरीके से बढ़ा है. लेकिन जांच करने पर पता चला कि पेट के अंदर करीब 41 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ मौजूद है. इसके बाद पूरे मामले को देखते हुए अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई, जिसमें डॉ. निशा कपूर, डॉ. सचिन मित्तल समेत सात डॉक्टर शामिल थे.
4 घंटे तक चली सर्जरी
डॉ. बीरबल बताते हैं कि इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर को बिना फटे पूरा का पूरा बाहर निकालना था. अगर गांठ फट जाती तो जांच और इलाज दोनों मुश्किल हो सकते थे. इसलिए पूरी टीम ने पहले से पूरी योजना बनाई और करीब चार घंटे तक बेहद सावधानी के साथ सर्जरी की. आखिरकार 7 किलो का ट्यूमर सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया. ऑपरेशन के दौरान खून भी बहुत कम बहा और महिला की हालत पूरी तरह नियंत्रण में रही.
डॉ. बीरबल बताते हैं कि यह ट्यूमर पूरे पेट में फैल चुका था और आंतों के साथ कई जरूरी अंगों पर दबाव बना रहा था, इसलिए ऑपरेशन आसान नहीं था. ट्यूमर को धीरे-धीरे दूसरे अंगों से अलग किया गया, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी सर्जरी तभी सफल होती है, जब अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ मिलकर काम करें.
सामान्य समस्या मानकर किया नजरअंदाज
डॉ. बीरबल बताते हैं कि सबसे हैरानी की बात यह रही कि महिला को इतने बड़े ट्यूमर का अंदाजा ही नहीं था. उन्हें बस इतना लगता था कि उनका वजन बढ़ रहा है. कभी-कभी कब्ज रहती थी और शौच करने में दिक्कत होती थी, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया. अगर समय रहते जांच कराई जाती तो ट्यूमर इतना बड़ा नहीं होता. फिलहाल ट्यूमर की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है, जिसके बाद ही साफ होगा कि उसमें कैंसर के लक्षण हैं या नहीं.
अब महिला की हालत स्थिर
डॉ. बीरबल बताते हैं कि ऑपरेशन के बाद जब महिला दोबारा उनसे मिली, तो वह मुस्कुरा रही थी. उन्होंने कहा कि अब उन्हें खुद हल्का महसूस हो रहा है, चलने-फिरने में भी आसानी है और वह सामान्य खाना भी खा रही है. डॉक्टरों के मुताबिक अब उनकी हालत पूरी तरह ठीक है और आगे भी नियमित जांच कराते रहने की सलाह दी गई है. डॉ. बीरबल बताते हैं कि महिला को खाने-पीने को लेकर भी जरूरी सलाह दी गई है. रोज 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए. खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, पपीता और फाइबर वाली चीजें शामिल करें. मैदे से बनी चीजें और फास्ट फूड से दूरी रखें, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर स्वस्थ बना रहे.
क्यों पता नहीं चलती बीमारी?
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की निदेशक डॉ. निशा कपूर बताती हैं कि महिला को सिर्फ पेट बढ़ने और वजन बढ़ने की चिंता थी. उन्हें लगा कि यह सामान्य मोटापा है. अंडाशय की गांठ की यही सबसे बड़ी परेशानी है कि कई बार इससे पीरियड्स प्रभावित नहीं होते, इसलिए महिलाओं को बीमारी का अंदाजा नहीं लग पाता. इस महिला के साथ भी यही हुआ. उन्हें चलने में दिक्कत थी, लेकिन पीरियड्स सामान्य थे. इसलिए उन्होंने जांच नहीं कराई. डॉ. निशा कहती हैं कि ऐसे मामले बहुत ज्यादा नहीं आते, लेकिन साल या डेढ़ साल में एक-दो मरीज इस तरह के जरूर मिल जाते हैं. वह सभी महिलाओं से अपील करती हैं कि साल में कम से कम एक बार रुटीन हेल्थ चेकअप जरूर कराएं, ताकि ऐसी गंभीर बीमारी समय रहते पकड़ में आ सके.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें












