अंबाला: कभी तेज धूप, कभी भारी बारिश और कभी असमय ठंड… बदलते मौसम ने खेती को पहले से कहीं ज्यादा जोखिम भरा बना दिया है. सबसे अधिक चिंता उन किसानों की बढ़ी है जो सब्जियों और बागवानी फसलों पर निर्भर हैं, क्योंकि थोड़ी-सी मौसम की गड़बड़ी भी पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे समय में हरियाणा सरकार की संरक्षित खेती योजना किसानों के लिए राहत और बेहतर कमाई का नया रास्ता बनकर उभर रही है. बता दें कि अंबाला जिले में अब कई किसान परंपरागत खेती छोड़कर नेट हाउस और पॉली हाउस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं.
नेट हाउस में मौसम का असर होता है कम
इस बारे में लोकल 18 को जानकारी देते हुए अंबाला जिला बागवानी अधिकारी सत्यनारायण ने बताया कि नेट हाउस के जरिए किसान नियंत्रित वातावरण में खेती कर सकते हैं, जिससे फसल पर गर्मी, बारिश, ओलावृष्टि और ठंड का असर काफी कम हो जाता है. यही वजह है कि इस तकनीक से उगाई गई सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं.
सरकार दे रही है 50 प्रतिशत तक सब्सिडी
उन्होंने बताया कि सरकार नेट हाउस लगाने पर करीब 50 प्रतिशत तक अनुदान देती है और एक परिवार अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र में नेट हाउस स्थापित कर सकता है. उन्होंने कहा कि एक एकड़ नेट हाउस तैयार करने में लगभग 28 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसमें करीब 14 लाख रुपये तक की सहायता सरकार की ओर से दी जाती है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाता है.
जुलाई-अगस्त में लगाएं नेट हाउस, उगाएं ये फसलें
उन्होंने बताया कि जुलाई और अगस्त का महीना नेट हाउस लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है, क्योंकि इस दौरान तैयार संरचना में किसान सर्दियों की फसलें सुरक्षित तरीके से उगा सकते हैं. नेट हाउस में टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च, बेल वाली सब्जियां और फूलों की खेती की जाती है. नियंत्रित तापमान और नमी के कारण इन फसलों की पैदावार सामान्य खेती की तुलना में अधिक होती है.
ड्रिप इरिगेशन से पानी की होती है बचत
बागवानी अधिकारी सत्यनारायण ने बताया कि इस पद्धति का एक बड़ा फायदा पानी की बचत है. नेट हाउस में ड्रिप इरिगेशन के जरिए सिंचाई की जाती है, जिससे जरूरत के अनुसार ही पानी दिया जाता है. साथ ही रोग और कीटों का प्रकोप कम होने से दवाइयों और रासायनिक खादों का उपयोग भी घट जाता है. इससे उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को बेहतर लाभ मिलता है.
इस तरह करें योजना के लिए आवेदन
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसान को “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” (MFMB) पोर्टल पर अपनी जमीन और फसल का पंजीकरण कराना होता है. इसके बाद “Protected Cultivation” या “Net House Subsidy Scheme” का चयन कर आवेदन किया जाता है. आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन की जमाबंदी तथा मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट जमा करनी होती है. विभागीय निरीक्षण के बाद मंजूरी मिलने पर ही निर्माण कार्य शुरू किया जाता है.
कम जमीन में ज्यादा उत्पादन का बेहतर विकल्प
उन्होंने बताया कि बदलते मौसम के इस दौर में नेट हाउस केवल खेती की नई तकनीक नहीं, बल्कि किसानों के लिए जोखिम कम करने, पानी बचाने और स्थायी आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है. सरकार की यह योजना खासकर उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो कम जमीन में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा चाहते हैं.











