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Agriculture Machinery Subsidy : खेती के लिए ट्रैक्टर या कृषि यंत्र खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले सरकार की सब्सिडी योजना जरूर जान लें. हरियाणा में कई कृषि यंत्रों पर 40% से 50% तक सब्सिडी मिलती है. आवेदन CSC सेंटर के जरिए होता है और चयन लकी ड्रॉ से किया जाता है. सत्यापन के बाद कृषि यंत्र खरीदने पर सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है. लोकल 18 से डींग गांव के किसान सुंदर सिंह बताते हैं कि सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है. आमतौर पर दो से तीन महीने में पैसा खाते में आ जाता है. योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी हैं. फैमिली आईडी में जिस सदस्य के नाम जमीन दर्ज है, वही आवेदन कर सकता है.
फरीदाबाद. खेती में मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. सरकार कृषि यंत्र खरीदने पर अच्छी-खासी सब्सिडी भी देती है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई किसान योजना का फायदा नहीं उठा पाते. अगर आप भी ट्रैक्टर या खेती के दूसरे उपकरण खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि आवेदन कैसे करना है, कितनी सब्सिडी मिलती है और किन किसानों को इसका लाभ मिलेगा. लोकल 18 से किसान सुंदर सिंह बताते हैं कि मैं फरीदाबाद के डीग गांव का रहने वाला हूं और 15 एकड़ में खेती करता हूं. सरकार समय-समय पर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन मांगती है. किसान को अपने नजदीकी सीएससी सेंटर पर जाकर आवेदन करना होता है. सरकार अलग-अलग कृषि यंत्रों पर 40 प्रतिशत या 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है. आवेदन करने के बाद लकी ड्रॉ निकाला जाता है.
कृषि विभाग करता है फोन
सुंदर सिंह बताते हैं कि मैं भी इस योजना का लाभ ले चुका हूं. लकी ड्रॉ फरीदाबाद के सेक्टर-12 में होता है, जिस किसान का नाम ड्रॉ में आता है उसे कृषि विभाग की तरफ से फोन करके बुलाया जाता है. इसके बाद किसान को अपने जरूरी दस्तावेज जमा कराने होते हैं. दस्तावेजों की जांच और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन होने के बाद किसान को बताया जाता है कि वह जिस कृषि यंत्र के लिए आवेदन किया था वह उसे खरीद सकता है. खरीदने के बाद बिल कृषि विभाग में जमा करना होता है. सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है. आमतौर पर दो से तीन महीने में पैसा खाते में आ जाता है.
पट्टे पर खेती करने वालों का क्या?
सुंदर सिंह बताते हैं कि हर कृषि यंत्र पर सब्सिडी की राशि अलग-अलग तय होती है. जैसे रोटावेटर पर करीब 40 हजार रुपये, जीरो टिल ड्रिल मशीन पर करीब 28 हजार रुपये और कुछ दूसरे कृषि यंत्रों पर 30 हजार रुपये. सुपर सीडर जैसे महंगे कृषि यंत्र पर करीब 1 लाख 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. जिस उपकरण की कीमत जितनी होती है, उसी हिसाब से सरकार सब्सिडी तय करती है. सुंदर सिंह बताते हैं कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी हैं. परिवार पहचान पत्र (फैमिली आईडी) में जिस सदस्य के नाम जमीन दर्ज है, वही आवेदन कर सकता है. परिवार में माता, पिता, भाई या किसी अन्य सदस्य के नाम जमीन होने पर भी योजना का लाभ मिल सकता है. हालांकि पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को सामान्य तौर पर यह सुविधा नहीं मिलती क्योंकि आवेदन के दौरान जमीन के रिकॉर्ड की जांच की जाती है.
परिवार में ट्रैक्टर दर्ज होना जरूरी
सुंदर सिंह बताते हैं कि अगर किसी किसान ने ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराया है तो भविष्य में ऐसे किसानों को भी राहत मिल सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि आवेदन उसी किसान का स्वीकार होगा, जिसके परिवार में ट्रैक्टर दर्ज हो. अगर परिवार में किसी भी सदस्य के नाम ट्रैक्टर है तो किसान सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकता है. जिनके नाम ट्रैक्टर नहीं है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. सभी दस्तावेजों का सत्यापन मोहना मंडी में किया जाता है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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