हरियाणा का अनोखा और सबसे छोटा गांव: तीन मतदाता, यहां के सरपंच है भगवान शिव

On: April 29, 2025 5:40 AM
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सबसे छोटा गांव

हरियाणा का सबसे छोटा गांव कौन सा है। वैसे तो ऑफिशियल कैथल ज़िले में बसा खडालवा गांव सबसे छोटा है। ये एक ऐसा गांव है, जो अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण सुर्खियों में रहता है।

खडालवा नामक यह गांव न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे भारत में अपनी तरह का इकलौता गांव है, जहां केवल तीन मतदाता हैं, फिर भी इसे पूर्ण गांव का दर्जा प्राप्त है। हैरानी की बात यह है कि इस गांव में एक भी घर नहीं है, और ये तीन मतदाता—महंत रघुनाथ गिरी और उनके दो शिष्य लाल गिरी व आत्मा गिरी—आज तक अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाए।

इसके बावजूद, बड़े-बड़े राजनीतिक नेता इस गांव में आकर शीश झुकाते हैं। इस गांव की पहचान एक प्राचीन शिव मंदिर से है, जो हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। आइए, इस अनोखे गांव की कहानी को विस्तार से जानते हैं।

खडालवा गांव: एक नजर में

खडालवा गांव कैथल जिले के कलायत क्षेत्र में स्थित है। सरकारी रिकॉर्ड में इसे पूर्ण गांव का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां कोई स्थायी आबादी नहीं है। गांव का पूरा अस्तित्व एक प्राचीन शिव मंदिर के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के पुजारी महंत रघुनाथ गिरी और उनके दो शिष्य ही गांव के एकमात्र निवासी और मतदाता हैं। गांव में कोई घर नहीं है, लेकिन इसके नाम पर 16 एकड़ कृषि और गैर-कृषि भूमि दर्ज है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से गायों के लिए चारा और मंदिर के भंडारे के लिए गेहूं व धान की खेती के लिए किया जाता है।

सबसे छोटा गांव

प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

महंत रघुनाथ गिरी के अनुसार, खडालवा गांव का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है और यह भगवान राम के रघुवंश से जुड़ा हुआ है। किसी समय यह गांव एक विकसित सांस्कृतिक केंद्र था, लेकिन शक और हूणों के आक्रमणों ने इसे पूरी तरह तबाह कर दिया। इसके बाद यह गांव दोबारा कभी आबाद नहीं हो सका। पुरातात्विक खुदाई में यहां प्राचीन दीवारों के अवशेष, मिट्टी के बर्तन, औजार, चूड़ियां और मानव जीवन से जुड़ी अन्य वस्तुएं मिलती हैं, जो इसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती हैं।

गांव में स्थित शिव मंदिर को 5,000 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सभी राजनीतिक दलों के नेता चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले इस मंदिर में आकर आशीर्वाद लेते हैं, भले ही गांव में कोई मतदाता प्रभाव न हो। मंदिर की यह प्रतिष्ठा इसे क्षेत्र में एक विशेष स्थान दिलाती है।

गांव की सुविधाएं और व्यवस्था

खडालवा गांव भले ही आबादी के मामले में शून्य हो, लेकिन यहां की सुविधाएं किसी बड़े गांव से कम नहीं हैं। गांव के नाम पर निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं:

  • राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय: यह स्कूल 4 एकड़ से अधिक जमीन पर बना है, जिसमें खेल का मैदान भी शामिल है। खास बात यह है कि यहां खडालवा के बच्चे नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल का प्रदर्शन कई पड़ोसी स्कूलों से बेहतर है।

  • सहकारी बैंक: गांव में एक सहकारी बैंक भी स्थापित है, जो आसपास के लोगों को सेवाएं प्रदान करता है।

  • अस्थायी बस स्टैंड और गोशाला: गांव की जमीन पर एक अस्थायी बस स्टैंड और गायों के लिए गोशाला भी बनी हुई है।

  • धर्मशाला: मंदिर परिसर में एक धर्मशाला है, जहां बाहरी यात्री तीन दिन तक निःशुल्क ठहर सकते हैं। इससे अधिक समय के लिए मंदिर के पुजारी की अनुमति आवश्यक है।

  • दो सड़कें और गलियां: गांव की जमीन पर सड़कें और गलियां भी विकसित की गई हैं।

गांव की सारी जमीन और संपत्ति मंदिर के नाम पर दर्ज है, और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, भगवान शिव को ही इस गांव का सरपंच और पंच माना जाता है।

सबसे छोटा गांव

प्रशासनिक व्यवस्था

खडालवा गांव को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण गांव का दर्जा प्राप्त होने के कारण इसे अलग पटवारी और नंबरदार नियुक्त किए गए हैं। हालांकि, प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला प्रशासन ने पास के मटौर गांव के नंबरदार को जिम्मेदारी सौंपी है। महंत रघुनाथ गिरी के अनुसार, उन्हें प्रशासनिक कार्यों में कभी कोई समस्या नहीं हुई। उनके पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड, और बैंक पासबुक जैसे सभी दस्तावेज हैं, लेकिन उन्होंने किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया।

राजनीतिक ध्यान का केंद्र

खडालवा गांव की सबसे रोचक बात यह है कि केवल तीन मतदाताओं के बावजूद यह राजनीतिक नेताओं के लिए महत्वपूर्ण है। कलायत के एसडीएम सत्यवान मान के अनुसार, इस गांव का प्राचीन शिव मंदिर क्षेत्र में अत्यधिक सम्मानित है। सभी दलों के नेता चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले इस मंदिर में आकर आशीर्वाद लेते हैं। यह परंपरा गांव को राजनीतिक दृष्टि से एक अनोखा स्थान प्रदान करती है। तीनों मतदाता अपने वोट पड़ोसी गांव मटौर में डालते हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक मतदान नहीं किया है।

सामाजिक और धार्मिक योगदान

खडालवा गांव का शिव मंदिर सामुदायिक भोज (भंडारा) का आयोजन करता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं। मंदिर की जमीन पर उगाई गई फसलों का उपयोग इन भोजों के लिए किया जाता है। इसके अलावा, मंदिर की गोशाला में गायों की देखभाल की जाती है, और चारे के लिए भी गांव की जमीन का उपयोग होता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

चुनौतियां और भविष्य

खडालवा गांव की सबसे बड़ी चुनौती इसकी आबादी का अभाव है। हालांकि, मंदिर और इसकी सुविधाओं के कारण यह गांव अपनी पहचान बनाए हुए है। भविष्य में, इस गांव को एक धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्राचीन शिव मंदिर और इसकी ऐतिहासिक विरासत इसे पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षक बना सकती है। सरकार द्वारा इस गांव की सड़कों, स्कूल, और अन्य सुविधाओं को और बेहतर करने से यह क्षेत्र और भी समृद्ध हो सकता है।

खडालवा गांव हरियाणा का एक अनोखा रत्न है, जो अपनी सादगी, प्राचीनता, और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। केवल तीन मतदाताओं वाला यह गांव न केवल प्रशासनिक दृष्टि से पूर्ण गांव है, बल्कि यह राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसका प्राचीन शिव मंदिर, जो हजारों वर्षों से इस धरती पर खड़ा है, इस गांव की आत्मा है। खडालवा गांव हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति जनसंख्या या भौतिक संपदा में नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, और सामुदायिक भावना में निहित होती है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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