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Vegetable crop subsidies : सर्दियों में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए हम अच्छी खबर लेकर आए हैं. अब उनकी सब्जियां पाले, कोहरे और कड़ाके की ठंड से बची रहेंगी. किसानों की इस चिंता को देखते हुए बागवानी विभाग मल्चिंग और लो टनल जैसी तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है. सर्दियों में टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, खीरा और दूसरी संवेदनशील सब्जियों पर ठंड और पाले का सीधा असर पड़ता है. लो टनल के लिए किसानों को 14 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अनुदान दिया जाता है. अंबाला बागवानी विभाग के अधिकारी विशाल लोकल 18 से बताते हैं कि मल्चिंग एक तरह की पॉलीथिन शीट है, जिसे खेत में क्यारियों के ऊपर बिछाया जाता है. इसमें उचित दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है, तापमान नियंत्रित रहता है, खरपतवार नहीं उगते हैं.
अंबाला. सितंबर का महीना शुरू होने वाला है. इसके साथ ही मौसम में बदलाव का दौर भी शुरू हो जाएगा. आने वाले कुछ सप्ताह में तापमान में गिरावट के साथ सर्दी अपना असर दिखाने लगेगी. ऐसे में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए अभी से खेतों की तैयारी करना जरूरी है, क्योंकि सर्दियों में कोहरा, पाला और कड़ाके की ठंड कई सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. किसानों की इसी चिंता को देखते हुए बागवानी विभाग मल्चिंग और लो टनल जैसी तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है. इन तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है. सर्दियों में टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, खीरा और दूसरी संवेदनशील सब्जियों पर ठंड और पाले का सीधा असर पड़ता है. इससे पौधों की बढ़वार रुकने के साथ उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. लो टनल और मल्चिंग तकनीक खेत में पौधों के आसपास अनुकूल वातावरण तैयार करती है, जिससे फसल को मौसम की मार से काफी हद तक बचाया जा सकता है.
सर्दियों में रामबाण
मल्चिंग एक विशेष प्रकार की पॉलीथिन शीट होती है, जिसे खेत में क्यारियों के ऊपर बिछाया जाता है. इसमें उचित दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है, तापमान नियंत्रित रहता है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है. सर्दियों में यह तकनीक पौधों को ठंड और पाले के प्रभाव से बचाने में भी मदद करती है. बागवानी विभाग के अनुसार, मल्चिंग प्रणाली अपनाने वाले किसानों को ढाई एकड़ क्षेत्र के लिए अधिकतम 16 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है. इससे किसानों की लागत का बोझ कम होता है.
लो टनल में कितनी मदद
लो टनल तकनीक में सब्जियों की कतारों के ऊपर लचीले ढांचे पर पारदर्शी प्लास्टिक शीट या नॉन-वोवन कवर लगाया जाता है. इससे पौधों के ऊपर छोटी सुरंग जैसी संरचना बन जाती है, जो मिनी ग्रीनहाउस की तरह काम करती है. यह पौधों को ठंड, पाले और तेज हवा से बचाने के साथ मिट्टी की नमी और तापमान को बनाए रखने में मदद करती है. लो टनल के लिए किसानों को 14 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अनुदान दिया जाता है. एक किसान अधिकतम 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र तक योजना का लाभ ले सकता है. इससे किसानों को फसल जल्दी तैयार करने और समय पर उपज बाजार पहुंचाने का फायदा भी मिल सकता है.
कहां करें आवेदन
अंबाला बागवानी विभाग के अधिकारी विशाल लोकल 18 से बताते हैं कि अंबाला में शिमला मिर्च समेत कई सब्जियों की खेती बड़े क्षेत्र में की जाती है. ऐसे में लो टनल लगाने से किसानों को पाले से फसल बचाने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलती है. लो टनल लगाने पर किसानों को प्रति एकड़ करीब 35 से 40 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है. किसान अधिकतम 10 हजार वर्ग मीटर यानी करीब 10 एकड़ क्षेत्र तक योजना का लाभ ले सकते हैं. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बागवानी विभाग के HortNet Haryana Portal पर पंजीकरण करना होगा. ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर भी किसान की फसल संबंधी जानकारी दर्ज होना जरूरी है. आवेदन के दौरान किसान को जरूरी दस्तावेजों के साथ परिवार पहचान पत्र यानी PPP की जानकारी भी देनी होगी.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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