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Faridabad ki local news : फरीदाबाद के दयालपुर गांव में एक रास्ता अपनी हालात पर आंसू बहा रहा है. रास्ता कच्चा होने से बारिश में कीचड़ और पानी भर जाता है. दूसरी तरफ तालाब का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और घरों तक पहुंच रहा है. बाइक और स्कूटी निकालना तो दूर, पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं. लोकल 18 से दयालपुर में रहने वाले बबलू हुड्डा बताते हैं कि 1952 से गांव के लोग वोट देते आए हैं, तब से यह रास्ता आज तक अच्छे दिन का इंतजार कर रहा है. सुरेंद्र बताते हैं कि पंचायत की तरफ से रास्ते पर मिट्टी डलवाई गई. किनारे दीवार बनाई गई, लेकिन पक्की सड़क नहीं बनाई गई. ज्यादा दिक्कत इसी से है.
फरीदाबाद. आजादी के 80 साल पूरे हो गए, देश ने तरक्की की कई सीढ़ियां चढ़ लीं, लेकिन फरीदाबाद के दयालपुर गांव में एक रास्ता ऐसा भी है, जहां विकास की रफ्तार जैसे थम गई हो. गांव के इस रास्ते की हालत देखकर लगता है कि 80 साल में भी इसकी तस्वीर नहीं बदली. रास्ता कच्चा है, जगह-जगह कीचड़ और पानी भर जाता है. बारिश के दिनों में यहां से बाइक और स्कूटी निकालना तो दूर, पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता. रास्ते के किनारे बना तालाब भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. गंदा पानी ओवरफ्लो होकर खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे किसानों की फसल खराब हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.
सिर्फ कागजों पर काम
लोकल 18 से बबलू हुड्डा बताते हैं कि मैं दयालपुर गांव का रहने वाला हूं. यह हमारा पैतृक गांव है. यह रास्ता हमारे चक का है. सामने करीब सवा दो बीघे का तालाब है. हमारे गांव में पांच जोहड़ (तालाब) हैं. सरकार की तरफ से तालाबों के सौंदर्यीकरण की बात कही जाती है, लेकिन यहां हालात अलग हैं. ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि एक-दो तालाबों का सौंदर्यीकरण सिर्फ कागजों में हुआ है. 2014 में फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया था. पंचायत की तरफ से इस रास्ते के किनारे दीवार भी बनवाई गई और मिट्टी डलवाई गई, लेकिन रास्ते को पक्का नहीं किया गया. बबलू कहते हैं कि 1952 से हमारे बुजुर्ग वोट देते आ रहे हैं, तब से यह रास्ता आज तक अच्छे दिन का इंतजार कर रहा है.
सुरेंद्र बताते हैं कि इसी रास्ते पर अंत में एक मकान है, लेकिन रास्ते की खराब हालत के कारण परिवार घर पर ताला लगाकर दूसरी जगह चला गया. बारिश के समय हालात और बिगड़ जाते हैं. पंचायत की तरफ से रास्ते पर मिट्टी डलवाई गई और किनारे दीवार बनाई गई, लेकिन पक्की सड़क नहीं बनाई गई. हमारी मांग है कि इस रास्ते का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो.
जहरीले जीव का आंतक
संजीव हुड्डा बताते हैं कि मैं भी इसी गांव का रहने वाला हूं. रास्ते और तालाब को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ. तालाब का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के घरों और खेतों तक पहुंच जाता है. इससे किसानों की फसल को नुकसान हो रहा है और लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. तालाब की सफाई नहीं होने से मच्छरों की समस्या बनी रहती है और जहरीले सांप भी आसपास दिखाई देते हैं. शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की तरफ से ठोस कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीण चाहते हैं कि रास्ते को पक्का करने के साथ तालाब की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था भी की जाए.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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