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Faridabad News: इन दिनों बारिश और तेज हवा से किसानों की तैयार धान की फसल खेतों में बिछ गई. किसान पदम सिंह के मुताबिक, 4 एकड़ में लगी 1509 किस्म की फसल में करीब 40% नुकसान हुआ है. कटाई में 10-15 दिन बाकी थे. किसानों को पैदावार घटने और मंडी में दाम कम मिलने की चिंता है.
फरीदाबाद: फरीदाबाद के दयालपुर गांव में बारिश और तेज हवा से किसानों की तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई है. किसानों के मुताबिक, धान की कटाई में अब करीब 10 से 15 दिन का समय बचा था, लेकिन मौसम खराब होने से फसल गिर गई. किसान बता रहे हैं कि इस नुकसान से पैदावार कम होने के साथ मंडी में दाने का रेट भी प्रभावित हो सकता है. किसानों का कहना है कि साल की शुरुआत में गेहूं की फसल के समय भी आखिरी दौर में मौसम खराब होने से नुकसान हुआ था. अब धान की फसल में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है.
दयालपुर गांव के किसान पदम सिंह बताते हैं कि रात में बारिश के साथ तेज आंधी चली, जिसकी वजह से धान की फसल पूरी तरह से खेत में बिछ गई. 4 एकड़ जमीन में 1509 किस्म का धान लगाया हुआ है और लगभग पूरी फसल में नुकसान हुआ है. करीब 40 प्रतिशत नुकसान मानकर चल रहे हैं. पदम सिंह बताते हैं कि धान की खेती में करीब 20 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत आती है. फसल लगभग पककर तैयार हो चुकी थी और अगर 15 से 20 दिन मौसम ठीक रहता, तो धान की कटाई करके मंडी पहुंचाया जा सकता था.
फसल में पैदावार और रेट दोनों तरफ से नुकसान
उन्होंने कहा कि खेत में नीचे गिरे दाने ठीक से नहीं पक पाएंगे और कुछ दाने काले पड़ सकते हैं. इससे पैदावार कम होने के साथ मंडी में रेट भी कम मिलने की चिंता है. पदम सिंह बताते हैं कि किसान पूरे साल मेहनत और खर्च करके फसल तैयार करता है और आखिरी समय में मौसम की मार से मेहनत प्रभावित हो जाती है. इस समय धान की फसल में पैदावार और रेट दोनों तरफ से नुकसान होने की आशंका है.
बारिश में केमिकल छोड़े जाने का दावा
किसान नेता बबलू हुड्डा बताते हैं कि धान की फसल को बारिश और हवा से काफी नुकसान हुआ है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि यह कृत्रिम बारिश थी और नेचुरल बारिश नहीं थी. बबलू के मुताबिक, इस बारिश में केमिकल छोड़े जाने की बात भी बताते हैं और कहते हैं कि इसका असर धान की फसल पर पड़ा है. हालांकि कृत्रिम बारिश और केमिकल छोड़े जाने से जुड़ा यह दावा बबलू हुड्डा की ओर से किया गया है.
बबलू हुड्डा बताते हैं कि धान की फसल खराब होने से किसानों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. फसल तैयार होने के समय मौसम खराब होने से किसान की मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होती है. दयालपुर गांव के किसान अब खेतों में गिरी धान की फसल को लेकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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