आश्रम छोड़ सड़क पर उतरे 77 साल के संत, दिल्ली के जंतर-मंतर तक करेंगे यात्रा, क्या है इनका संकल्प?

On: October 4, 2026 2:14 PM
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अंबाला: नशे के खिलाफ अक्सर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं, मंच सजते हैं और भाषण भी दिए जाते हैं, लेकिन पानीपत से शुरू हुई एक यात्रा का तरीका कुछ अलग है. यहां एक रथ तैयार किया गया है, जिस पर नशे के खिलाफ श्लोक और संदेश लिखे गए हैं. दरअसल इसी रथ के साथ 77 वर्षीय स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य गांव-गांव और शहर-शहर पहुंच रहे हैं. उनका मकसद युवाओं से सीधे संवाद करना और उन्हें नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाना है.

बता दें कि पानीपत से शुरू हुई ‘सेवा संकल्प-नशा मुक्ति अभियान यात्रा’ अब अंबाला पहुंची है. सनातन संस्कृति जागृति ट्रस्ट के सौजन्य से शुरू हुई इस यात्रा में संत और उनके साथियों की टोली लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है. स्वामी नरेशानंद का कहना है कि नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरा परिवार झेलता है. इसलिए युवाओं को शुरुआत में ही जागरूक करना जरूरी है, ताकि वे नशे की तरफ जाने से पहले उसके नुकसान को समझ सकें.

युवाओं को नशे से बचाने का संकल्प
वहीं लोकल 18 से बातचीत में स्वामी नरेशानंद सैनाचार्य ने बताया कि वह 77 साल की उम्र में यह यात्रा किसी व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से बचाने के संकल्प के साथ कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा पानीपत से शुरू हुई है और डेढ़ हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय करेगी. रास्ते में गांवों और शहरों में लोगों से संपर्क किया जा रहा है. खासतौर पर युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि उनके साथ करीब 10 से 12 लोगों की टोली चल रही है. चार-पांच अन्य गाड़ियां भी यात्रा का हिस्सा हैं. इनमें एक गाड़ी को विशेष तौर पर रथ का रूप दिया गया है और रथ पर नशे के खिलाफ श्लोक और संदेश लिखे गए हैं, ताकि सड़क से गुजरते समय लोग इन्हें पढ़ सकें. यात्रा के दौरान युवाओं से संवाद करने के साथ उन्हें नशे से दूर रहने का संकल्प भी दिलाया जाता है.

ऐसे शुरू की यात्रा
वहीं स्वामी नरेशानंद ने बताया कि आश्रम में उनके पास ऐसे कई परिवार आते हैं, जो अपने बच्चों की नशे की आदत को लेकर परेशान रहते हैं. कई माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उनका बेटा नशे की गिरफ्त में आ गया है. परिवारों का यह दर्द देखकर उन्होंने महसूस किया कि युवाओं को केवल आश्रम में बुलाकर जागरूक करने के बजाय उनके बीच जाकर बात करने की जरूरत है. इसी सोच के साथ उन्होंने यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया.

दिल्ली तक पहुंचेगी अंबाला की यात्रा
उन्होंने कहा कि वह इस अभियान में युवाओं को आध्यात्मिकता से जोड़ने का भी प्रयास कर रहे हैं. उनका मानना है कि युवा अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे तो वह खुद के साथ परिवार और समाज के लिए भी बेहतर भविष्य बना सकते हैं. इसी संदेश को लेकर यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है. यात्रा की शुरुआत पानीपत में कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि द्वारा हरी झंडी दिखाकर की गई थी. अंबाला के बाद यात्रा चंडीगढ़ जाएगी, जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल को ज्ञापन देने की योजना है. इसके बाद वाघा बॉर्डर, अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा, पटियाला, हिसार, कैथल और नारनौल सहित कई स्थानों से होते हुए यात्रा दिल्ली पहुंचेगी.

मादक पदार्थों की तस्करी रोकने की मांग
वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर नशा मुक्ति और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग को लेकर भारत सरकार के निवेदन प्रस्तुत किया जाएगा. इसके बाद यात्रा वापस पानीपत पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा. स्वामी नरेशानंद का कहना है कि युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं, इसलिए उन्हें नशे से बचाने के लिए समाज को मिलकर प्रयास करना होगा. यात्रा का संदेश भी यही है कि जागरूकता केवल मंच तक सीमित न रहे, बल्कि हर उस युवा तक पहुंचे जिसे सही दिशा की जरूरत है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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