फरीदाबाद: उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का कमजोर होना आम समस्या मानी जाती है, लेकिन कई बार हड्डियां कमजोर होने के बावजूद शरीर में कोई दर्द या लक्षण दिखाई नहीं देते. ऐसे में व्यक्ति को बीमारी का पता तब चलता है, जब हल्की चोट लगने पर भी हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है. इस बीमारी को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं. यह समस्या खासतौर पर 55 से 60 वर्ष की उम्र के बाद अधिक देखने को मिलती है. महिलाओं में मेनोपॉज के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है. अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में कार्यरत डॉक्टर साहिल ने लोकल18 से बातचीत में इस बीमारी के कारण, लक्षण और जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी.
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस?
डॉक्टर साहिल बताते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और खोखली होने लगती हैं. इससे उनकी मजबूती कम हो जाती है और फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है. इसे इनविजिबल डिजीज यानी ऐसी बीमारी भी कहा जाता है, जिसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते. कई वर्षों तक व्यक्ति को अपनी हड्डियों की कमजोरी का पता नहीं चलता और पहली बार फ्रैक्चर होने पर समस्या सामने आती है.
युवाओं में भी हो सकती है यह बीमारी
डॉक्टर साहिल बताते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर 55 से 60 वर्ष की उम्र के बाद अधिक होता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करने, स्टेरॉयड युक्त इनहेलर इस्तेमाल करने, कम उम्र में मेनोपॉज होने और हार्मोनल असंतुलन जैसी स्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है. कुछ अन्य दवाएं भी हड्डियों को कमजोर करने का कारण बन सकती हैं.
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अधिक खतरा
डॉक्टर साहिल बताते हैं कि बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेनोपॉज के बाद इस हार्मोन का स्तर अचानक कम होने लगता है. इससे हड्डियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है.
हल्की चोट से फ्रैक्चर होना बड़ा संकेत
डॉक्टर साहिल बताते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस में हल्की चोट या मामूली गिरावट से भी हड्डी टूट सकती है. कमर दर्द के कई दूसरे सामान्य कारण भी होते हैं, इसलिए इसे सीधे इस बीमारी से जोड़ना सही नहीं है. इसी तरह, लंबाई कम होने के पीछे पोषण, आनुवंशिकता और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारण हो सकते हैं.
किस उम्र में करानी चाहिए जांच?
डॉक्टर साहिल बताते हैं कि हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए DXA स्कैन कराया जाता है. इससे बोन मिनरल डेंसिटी यानी हड्डियों में खनिजों के घनत्व का पता चलता है. आमतौर पर 55 से 60 वर्ष की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह से हर एक या दो साल में यह जांच करानी चाहिए. रिपोर्ट में हड्डियों का घनत्व कम मिलने पर समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है.









